देश की संपत्तियों को बेच रही है केंद्र सरकार : डॉ राजीव नारायण प्रसाद

कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट डॉ राजीव नारायण प्रसाद ने आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने निजीकरण से रोजगार, आर्थिक असमानता और जमाकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

News Aroma
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रांची : केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कांग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट डॉ राजीव नारायण प्रसाद ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 सालों में अभी तक की सबसे बड़ी सरकारी संपत्ति आईडीबीआई बैंक को निजी हाथों में बेच दिया है। आईडीबीआई बैंक की स्थापना 1 जुलाई 1964 को भारत में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने एवं औद्योगिक इकाइयों को दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराने के लिए की गई थी । केंद्र की भाजपा सरकार ने 62 साल पुराने आईडीबीआई बैंक की बिक्री को मंजूरी दे दी है केंद्र की भाजपा सरकार एवं लईसी LIC ने मिलकर बैंक में अपने 60.72% हिस्सेदारी कनाडा कंपनी ” कनाडा इंक” को बेचेगी जिसके पैरंट कंपनी “फेयरफैक्स” है। यह डील करीब 52,878 करोड़ रुपए मैं होने का प्रस्ताव है।

केंद्र की भाजपा सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह से असफल है इसलिए सरकारी संपत्तियों को निजीकरण करते जा रही है एवं लोगों को निजीकरण के झूठे फायदे समझा रही है। निजीकरण से रोजगार पर संकट और और असुरक्षा, आर्थिक असमानता में वृद्धि, सामाजिक कल्याण की अपेक्षा एवं बुनियादी सुविधाएं महंगी होना आम बात होती है जिससे सामान्य तबके के लोग विपरीत रूप से प्रभावित होते हैं।

फेयरफैक्स कनाडा कंपनी पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वह अपनी संपत्ति को बढ़कर दिखाती है ताकि लोग उस कंपनी में निवेश कर सके एवं लेखा-जोखा भी कंपनी गलत रूप से प्रस्तुत करती है। अगर विपरीत परिस्थितियों में कंपनी फेयरफैक्स दिवालिया घोषित होती है तो किसी भी ग्राहक को चाहे वह सेविंग अकाउंट रखें, चाहे करंट अकाउंट रखें, चाहे डिपॉजिट रखें,चाहे फिक्स्ड डिपॉजिट रखें किसी भी रूप में, कंपनी को ग्राहक को 5 लाख तक का ही भुगतान करना पड़ेगा, बाकी सारा पैसा डूब जाएगा ग्राहकों का।

केंद्र सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छुपाने के लिए निजीकरण के अलग-अलग तर्क प्रस्तुत कर रही है परंतु भारत देश के लोग यह समझ चुके हैं कि उनका वर्तमान एवं भविष्य अब सुरक्षित हाथों में नहीं है।
कांग्रेस के शासनकाल में स्थापित सरकारी कंपनियों को भाजपा सरकार बेचना बंद करें और नरेंद्र मोदी चूंकि आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह से असफल है, उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

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