
नई दिल्ली : अगर आपके पास पुरानी कार या दोपहिया वाहन है, तो 1 अप्रैल 2026 से आपकी गाड़ी की सेहत और माइलेज का गणित बदलने वाला है। पेट्रोलियम मंत्रालय के तय लक्ष्य के अनुसार देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिला पेट्रोल (E20) बेचना अनिवार्य होने जा रहा है। इसके साथ ही एक बड़ी शर्त यह भी है कि इस पेट्रोल की क्वालिटी (रिसर्च ऑक्टेन नंबर – RON) कम से कम 95 होनी चाहिए। सरकार का यह कदम कच्चे तेल का आयात घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए उठाया गया है।
अप्रैल 2023 के बाद बनी ‘नई गाड़ियां’ (BS6 Phase-2) तो इस ईधन के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन ‘पुरानी गाड़ियों’ (2023 से पहले की) के इंजन में पानी जमा होने, रबर के पुर्जे गलने और माइलेज घटने का खतरा बढ़ जाएगा। आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह E20 पेट्रोल आखिर है क्या, ऑटोमोबाइल कंपनियां और विशेषज्ञ इसे लेकर क्या कहते हैं और इससे बचाव के लिए पुराने वाहन मालिक क्या उपाय कर सकते हैं।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिस पर हर साल अरबों डॉलर खर्च होते हैं। पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने से विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी। दूसरा बड़ा फायदा पर्यावरण को है, क्योंकि एथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा साफ जलता है और प्रदूषण कम करता है। सबसे अहम बात यह है कि एथेनॉल गन्ने के रस, मक्के और खराब हो चुके अनाज से बनाया जाता है। इससे सीधे तौर पर किसानों को उनकी फसल का अच्छा दाम मिलेगा और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वाहनों पर E20 के असर और पुरानी गाड़ियों के खराब होने की चिंताओं पर देश की शीर्ष ऑटोमोबाइल संस्थाओं ने स्थिति स्पष्ट की है। ‘सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (SIAM) के कार्यकारी निदेशक प्रशांत के. बनर्जी का स्पष्ट कहना है कि लाखों वाहन पहले से E20 पर चल रहे हैं और किसी भी बड़े ब्रेकडाउन या खराबी की रिपोर्ट नहीं आई है। जहां तक पुराने वाहनों का सवाल है, तो ई20 के उपयोग से ईंधन दक्षता (माइलेज) में मामूली गिरावट हो सकती है, लेकिन यह सुरक्षा के लिहाज से कोई जोखिम नहीं है। ओईएम (OEMs) द्वारा दी गई वारंटी भी पूरी तरह मान्य रहेगी।
इसके अलावा, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की टेस्टिंग में भी पाया गया है कि पुराने वाहनों को 1 लाख किलोमीटर तक E20 से चलाने पर इंजन में कोई असामान्य घिसावट नहीं देखी गई। हालांकि, स्वतंत्र ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा कम होती है, जिसके चलते पुरानी गाड़ियों की माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक घट सकती है।
विशेषज्ञों के भरोसे के बावजूद, एथेनॉल का रासायनिक स्वभाव पुरानी गाड़ियों के लिए कुछ व्यावहारिक दिक्कतें पैदा कर सकता है। एथेनॉल स्पंज की तरह काम करता है और हवा से नमी (पानी) सोखता है। अगर आप अपनी गाड़ी में E20 पेट्रोल डलवाकर उसे कई हफ्तों तक घर पर खड़ी छोड़ देते हैं, तो टंकी के अंदर का एथेनॉल हवा से नमी खींचकर पानी बन जाता है। कुछ समय बाद यह भारी होकर पेट्रोल से अलग होकर टंकी में नीचे बैठ जाता है। जब यह पानी मिला पेट्रोल इंजन में पहुंचता है, तो गाड़ी स्टार्ट होने में दिक्कत करती है और इंजन के अंदरूनी लोहे के हिस्सों में जंग लगने लगता है। इसके अलावा, एथेनॉल एक बहुत ही तेज ‘सॉल्वेंट’ है। पुरानी गाड़ियों की पेट्रोल की पाइपें और रबर की सील इस 20% एथेनॉल के हिसाब से नहीं बनाए गए थे। लगातार संपर्क में रहने से रबर सख्त होकर दरक सकता है, जिससे पेट्रोल लीक होने का खतरा पैदा हो सकता है।
95 RON पेट्रोल का क्या मतलब है ?
अक्सर कम क्वालिटी का पेट्रोल इंजन के अंदर समय से पहले जल जाता है, जिससे इंजन में ‘खट-खट’ (Knocking) की आवाज आती है। ऑक्टेन नंबर (RON) पेट्रोल की क्वालिटी बताता है। भारत में पहले 91 RON का सामान्य पेट्रोल मिलता था। चूंकि शुद्ध एथेनॉल का ऑक्टेन बहुत ज्यादा (करीब 108) होता है, इसलिए जब इसे 20% की मात्रा में पेट्रोल में मिलाया जाता है, तो पूरे तेल की क्वालिटी उछलकर 95 RON के पार हो जाती है। इसका फायदा यह है कि अब आपको प्रीमियम क्वालिटी का तेल मिलेगा, जिससे इंजन बिना आवाज किए स्मूथ चलेगा।
विस्तार से जानें, पुरानी गाड़ी वाले कैसे करें बचाव ?
जिन लोगों ने अप्रैल 2023 के बाद गाड़ी ली है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन 2023 से पहले की (खासकर BS4 और उससे पुरानी) गाड़ी वालों को अपनी गाड़ी को सुरक्षित रखने के लिए ये उपाय करने चाहिए:
1. फ्यूल लाइन्स (पाइप) को अपग्रेड करें : अपनी पुरानी गाड़ी की रबर वाली फ्यूल लाइन्स को बदलवा लें। सर्विस सेंटर पर जाकर मैकेनिक से साधारण रबर की जगह ‘टेफ्लॉन (PTFE)’ या E20 कम्पैटिबल पाइप्स डलवाएं। ये पाइप एथेनॉल के सॉल्वेंट प्रभाव को आसानी से झेल लेते हैं।
2. ‘एथेनॉल स्टेबलाइजर’ का इस्तेमाल : बाजार में खास तरह के फ्यूल एडिटिव्स या स्टेबलाइजर आते हैं। जब भी आप पेट्रोल डलवाएं, तो इसे डाल लें। यह एथेनॉल को हवा से नमी सोखने (पानी बनने) से रोकता है।
3. फ्यूल फिल्टर को जल्दी बदलें : एथेनॉल गाड़ी की टंकी में जमा पुरानी गंदगी को घोलकर इंजन की तरफ ले जाता है, जिससे फ्यूल फिल्टर जल्दी जाम हो जाता है। इसलिए अपनी सर्विसिंग का समय थोड़ा घटा दें और फिल्टर को पहले बदलवाएं।
4. टंकी को बहुत खाली या बहुत भरा न छोड़ें : टंकी में जितनी ज्यादा खाली जगह और हवा होगी, एथेनॉल उतनी ही तेजी से पानी बनाएगा। हालांकि, अगर गाड़ी महीनों खड़ी रहती है, तो टंकी फुल न करवाएं। उतना ही तेल डलवाएं जितना एक या दो हफ्ते में खर्च हो जाए।
5. गाड़ी को लंबे समय तक खड़ा न रखें : कोशिश करें कि गाड़ी हफ्ते में कम से कम 2-3 बार जरूर चले, ताकि पेट्रोल टंकी के अंदर सर्कुलेट होता रहे और पानी नीचे न बैठे।
6. जंग रोधी (Anti-Corrosion) ट्रीटमेंट : अगर गाड़ी की फ्यूल टैंक धातु (Metal) की है, तो सर्विसिंग के दौरान टैंक की सफाई करवाकर उसमें जंग-रोधी एडिटिव्स का इस्तेमाल जरूर करवाएं।
