नयी दिल्ली : भारत में फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने बुधवार को भारत सरकार से आग्रह किया कि वह गिरमिटिया मजदूरों की ऐतिहासिक समुद्री यात्राओं की याद में कोलकाता और दक्षिण भारत के दो अन्य बंदरगाहों को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की पहल करने पर विचार करे।
सामी ने यहां विज्ञान भवन में भारत की सभ्यतागत विरासत पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संस्थानों को अभिलेखों के संरक्षण और अपनी साझा विरासत के दस्तावेजीकरण के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

फिजी के उच्चायुक्त ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि इन साझा संबंधों को सार्थक सहयोग में बदला जा सकता है। उन्होंने पिछली दो शताब्दियों में की गईं उन भारतीयों की कठिन समुद्री यात्राओं का जिक्र किया, जिन्हें ‘गिरमिटिया’ मजदूरों के रूप में काम करने के लिए विभिन्न देशों में भेजा गया था। ‘गिरमिटिया’ शब्द का इस्तेमाल उन भारतीयों के लिए किया जाता है, जिन्हें फिजी, सूरीनाम, मालदीव और मॉरीशस जैसे देशों में बागानों में अनुबंधित मजदूरों के रूप में काम करने के लिए ले जाया गया था। उनके गीतों में जहाजों से की गई लंबी और जोखिम भरी यात्राओं का इतिहास आज भी संजोया हुआ है।
सामी ने खुद को गिरमिटिया बताते हुए कहा कि उनके पूर्वज 1900 के दशक में दक्षिण भारत से फिजी गए थे। उन्होंने कहा, ‘‘फिजी मेरी जन्मभूमि है और भारत मेरी मातृभूमि है।’’ सामी ने कहा, ‘‘मैं भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से आग्रह करता हूं कि वह कोलकाता, विशाखापत्तनम और मद्रास के बंदरगाहों से गिरमिटिया मजदूरों की रवानगी की याद में इन तीनों बंदरगाहों को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल घोषित कराने की पहल करने पर विचार करे।’’ किसी भी स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा दिए जाने के लिए संबंधित देश को पहले उसका नामांकन यूनेस्को के पास भेजना होता है। इसके बाद ही संगठन उस स्थल को विश्व धरोहर की मान्यता देने के लिए उसका मूल्यांकन कर सकता है।
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली में 14 से 16 अक्टूबर तक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। सम्मेलन का विषय भारत की सांस्कृतिक विरासत और देश की सीमाओं से परे फैली उसकी व्यापक सभ्यतागत विरासत है। ‘बृहत्तर भारत : विश्वभर में भारत के सांस्कृतिक संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ में कई देशों के प्रतिनिधि, राजदूत और विद्वान हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में भारत के दुनिया के अन्य देशों के साथ ऐतिहासिक और वर्तमान सांस्कृतिक संबंधों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।


