नयी दिल्ली: सरकार तंबाकू क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को और सख्त करने पर विचार कर रही है। सरकार का इरादा तंबाकू क्षेत्र में फ्रेंचाइजी, ट्रेडमार्क, ब्रांड नाम और प्रबंधन अनुबंध के लिए लाइसेंस देने को एफडीआई पर प्रतिबंध लगाने का है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और इस पर चर्चा चल रही है।
वर्तमान में तंबाकू या उसके विकल्पों से सिगार, चेरूट, सिगारिलो और सिगरेट के विनिर्माण में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबंधित है।
हालांकि, तंबाकू क्षेत्र में फ्रेंचाइजी, ट्रेडमार्क, ब्रांड नाम और प्रबंधन अनुबंधों के लिए लाइसेंस देने सहित किसी भी रूप में प्रौद्योगिकी सहयोग की अनुमति है।
यह प्रस्ताव नया नहीं है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने वर्ष 2024 में तंबाकू क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को और सख्त करने के प्रस्ताव पर काम किया था। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में प्रचार गतिविधियों पर अंकुश लगाना और तस्करी रोकना था, क्योंकि कंपनियां नियमों से बचने के तरीके अपना रही हैं।
हालांकि, तंबाकू किसान संगठनों सहित कुछ पक्षों की ओर से चिंताएं जताए जाने के कारण सरकार इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकी थी।
तंबाकू क्षेत्र में एफडीआई का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत तंबाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रूपरेखा संधि का हस्ताक्षरकर्ता है। इसके तहत देश की जिम्मेदारी तंबाकू उत्पादों की खपत कम करना है।
अनुमानों के अनुसार, तंबाकू की कुल खपत में सिगरेट की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है। स्वास्थ्य पर इसका सबसे अधिक बोझ मौखिक तंबाकू उत्पादों और बीड़ी के सेवन से पड़ता है। भारत में अब भी 25 करोड़ तंबाकू उपभोक्ता हैं, जो चीन के बाद दुनिया में दूसरे सबसे अधिक हैं। भारत में मौखिक तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या दुनिया के बाकी हिस्सों के कुल ऐसे उपभोक्ताओं से भी अधिक है।
उत्पादन को विनियमित करने, विदेशी बाजारों में विपणन को बढ़ावा देने और आपूर्ति तथा मांग में बार-बार होने वाले असंतुलन को नियंत्रित करने की जरूरत को देखते हुए सरकार ने तंबाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 के तहत वर्ष 1976 में तंबाकू बोर्ड की स्थापना की थी। आपूर्ति और मांग में असंतुलन से बाजार में समस्याएं पैदा होती हैं।
चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर हो गया।


