
हजारीबाग : शहर के टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज (डायट), झील रोड परिसर में आयोजित चार दिवसीय हजारीबाग पुस्तक मेले का शुक्रवार को दूसरा दिन है। गुरुवार को इसके उद्घाटन के साथ ही परिसर में सजे स्टालों पर पाठकों की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे क्षेत्र में साहित्यिक उत्सव का माहौल बन गया। इस अवसर पर आकाश कुमार ने कहा कि किताबें मन को सुकून देती हैं और उनका महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया ने पठन-पाठन की आदतों को प्रभावित किया है, लेकिन इस तरह के पुस्तक मेले समाज को फिर से किताबों की ओर लौटने का अवसर देते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिले के सभी स्कूलों के छात्र-छात्राओं की मेले में उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में पहल की जा रही है।
विचारों में झलकी चिंता और उम्मीद
कार्यक्रम में शिक्षाविद डॉ. प्रकाश कुमार, डॉ. सुनील कुमार यादव, पर्यावरणविद् मुरारी सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सुरजीत नागवाला, अशोक देव एवं साहित्यकार गणेश राही सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सुरजीत नागवाला ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को मोबाइल और तथाकथित ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के प्रभाव से बाहर निकलकर पुस्तकों की दुनिया से जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा विभाग से विद्यालयों में पुस्तक खरीद को बढ़ावा देने की भी अपील की।

13 किलो वजनी ‘श्रीदुर्गासप्तशती’ ने खींचा ध्यान
मेले में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र 31 हजार रुपए मूल्य की ‘श्रीदुर्गासप्तशती’ बनी हुई है। 13 किलो वजनी यह भव्य पुस्तक विश्व की पहली सचित्र कृति मानी जा रही है, जो संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी-तीनों भाषाओं में प्रकाशित है। 816 पृष्ठों वाली इस पुस्तक को आर्ट पेपर पर फोर कलर प्रिंटिंग और विशेष कोटिंग के साथ तैयार किया गया है। इसमें विभिन्न संग्रहालयों, चित्रकारों, कलाकारों, मठों और राजपरिवारों में संरक्षित 575 दुर्लभ एवं प्राचीन चित्रों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो इसे अद्वितीय बनाते हैं। डॉ. संदीप जोशी द्वारा लिखित यह ग्रंथ एक आकर्षक और सुसज्जित बॉक्स में रखा गया है। इसका विमोचन 21 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में किया गया था। सुंदर, आकर्षक और सरल प्रस्तुति के कारण यह पुस्तक मां दुर्गा के भक्तों के लिए विशेष आकर्षण और आस्था का केंद्र बनी हुई है। कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र देकर समय इंडिया, नई दिल्ली के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डायट के फैकल्टी सदस्य रंजीत वर्मा ने किया।
