ईडी–झारखंड पुलिस टकराव पर हाईकोर्ट सख्त, एफआईआर पर लगाई रोक

Archana Ekka
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Ranchi : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और झारखंड पुलिस के बीच चल रहे विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पेयजल घोटाले के आरोपी संतोष कुमार द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी पर अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही राज्य सरकार को ईडी अधिकारियों और कार्यालय को पूरी सुरक्षा देने का आदेश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में अगला आदेश आने तक ईडी के अधिकारियों के खिलाफ कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत के इस फैसले से ईडी के उन अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

ईडी की याचिका पर हुई सुनवाई

यह मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा, जब प्रवर्तन निदेशालय ने रांची पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ याचिका दाखिल की। ईडी ने कहा कि संतोष कुमार की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी गलत है और इसका उद्देश्य पेयजल घोटाले की जांच को प्रभावित करना है।

ईडी ने याचिका में प्राथमिकी को रद्द करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की थी। ईडी के अनुरोध पर अदालत ने मामले की जल्द सुनवाई की और 16 जनवरी को इस पर सुनवाई हुई।

अदालत की पुलिस कार्रवाई पर टिप्पणी

सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान कई बड़े अधिकारियों की भूमिका से जुड़े अहम सबूत मिले हैं। ऐसे समय में संतोष कुमार की प्राथमिकी जांच को भटकाने का प्रयास है।

इन दलीलों को सुनने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और एफआईआर पर रोक लगा दी। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ईडी कार्यालय और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अब बीएसएफ संभालेगी सुरक्षा

हाईकोर्ट के आदेश के बाद ईडी अधिकारियों की सुरक्षा के लिए अब BSF को तैनात किया जाएगा। इससे ईडी की जांच टीम को बिना किसी दबाव के काम करने में मदद मिलेगी।

क्या हैं संतोष कुमार के आरोप

पीएचईडी कर्मचारी संतोष कुमार ने 12 जनवरी को ईडी कार्यालय में पूछताछ दी थी। इसके अगले दिन, 13 जनवरी को उसने रांची के एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उसके साथ मारपीट हुई, सिर फोड़ दिया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।

इसी शिकायत की जांच के लिए झारखंड पुलिस की टीम गुरुवार को हिनू स्थित ईडी कार्यालय पहुंची थी और वहां जांच की थी। इसी कार्रवाई के बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया।

छात्रों की नजर में निष्कर्ष

इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि जांच एजेंसियों और पुलिस के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। हाईकोर्ट का यह फैसला कानून की निष्पक्षता और जांच की स्वतंत्रता को बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।