पेगासस स्पायवेयर का उपयोग कुछ देश नहीं कर पाएंगे

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वॉशिंगटन: दुनिया भर में पेगासस जासूसी को लेकर मचे हंगामे के बीच इजराइल की साइबर सिक्योरिटी फर्म एनएसओ ने दुनिया भर की सरकारों को पेगासस स्पायवेयर बेचने पर रोक लगा दी है।

ये जानकारी अमेरिकी मीडिया कंपनी एनपीआर को एनएसओ ग्रुप के ही एक कर्मचारी ने दी है।

हालांकि कंपनी के कर्मचारी ने यह जानकारी नहीं दी है कि किन सरकारों को कंपनी ने यह स्पायवेयर बेचा है और किन पर यह रोक लगाई गई है।

कंपनी की ओर से यह फैसला इजरायल की अथॉरिटीज की ओर से एनएसओ के दफ्तर पर जांच के लिए पहुंचने के एक दिन बाद लिया गया है।

एनपीआर की रिपोर्ट के मुताबिक एनएसओ ने कहा है उसने स्पाइवेयर के गलत इस्तेमाल के बाद पेगासस की बिक्री बंद कर दी है। कंपनी ने एक कर्मचारी ने नाम ना बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है।

एनएसओ कंपनी का कहना है कि वह इससे पहले भी कुछ देशों की एजेंसियों को पेगासस का गलत इस्तेमाल करने पर सेवाएं देने से रोक चुका है। इसमें 5 सरकारी एजेंसियां शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये एजेंसियां सऊदी अरब, दुबई और मैक्सिको की हैं। एनएसओ ने फिर दावा किया कि वो पेगासस स्पाईवेयर की सुविधा सिर्फ संप्रभु देशों या उसकी एजेंसियों को ही उपलब्ध कराती है।

उनकी क्लाइंट लिस्ट में 40 देशों के 60 कस्टमर हैं। ये सभी खुफिया एजेंसियां, सुरक्षा एजेंसियां और सेनाएं हैं।

कंपनी ने जोर दिया कि वो पेगासस की सेवाएं आतंकवाद और अपराध से लड़ने के लिए देशों को उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन हाल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सॉफ्टवेयर कई आम लोगों के मोबाइल फोन में भी पाया गया है।

बता दें हाल ही में फॉरबिडेन स्टोरीज और मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत 17 मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पेगासस के जरिए 50 देशों में पत्रकारों, नेताओं, कार्यकर्ताओं और कारोबारियों से जुड़े 50,000 फोन नंबरों की जासूसी कराई गई।

इनमें 189 मीडियाकर्मी, 600 से ज्यादा नेता और सरकारी कर्मचारी, 65 कारोबारी अधिकारी और 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं, जिनके फोन पर नजर रखी गई। पेगासस सॉफ्टवेयर को लेकर फ्रांस में बड़ा खुलासा हुआ है।

फ्रांसीसी साइबर सिक्योरिटी एजेंसी के मुताबिक वहां पर दो पत्रकारों के फोन की जासूसी पेगासस के जरिए की गई थी।

जिन दो पत्रकारों का फोन हैक होने की बात सामने आई है, उनके नाम हैं लीनेग ब्रेडॉक्स और एड्वी प्लेनेल। इन दोनों का नाम एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब की रिपोर्ट में दर्ज था।

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