कोलकाता: यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने एक प्रोफेसर को जारी किया गया नोटिस वापस ले लिया जिसमें उनसे परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को मंजूरी देने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसमें आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल हुई थीं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि संबंधित प्रोफेसर के साथ चर्चा के बाद नोटिस वापस लेने का फैसला किया गया।
कार्यक्रमों को मंजूरी देने और उनकी निगरानी करने वाली समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर गायेन भट्टाचार्जी से यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि उन्होंने सम्मेलन के आयोजन की अनुमति क्यों दी थी।
विश्वविद्यालय के अधिकारी के अनुसार, भट्टाचार्य ने प्रोफेसर को भेजे ईमेल में कहा, ‘‘आपके साथ हुई चर्चा के आधार पर मेरा मानना है कि अब आपकी ओर से और लिखित स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है।’’
अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही प्रोफेसर से मांगा गया स्पष्टीकरण वापस ले लिया गया है।
छह अक्टूबर को विश्वविद्यालय ने सम्मेलन को लेकर हुए विवाद के बाद कार्यक्रमों को मंजूरी देने वाली समिति को भंग कर दिया था और रजिस्ट्रार को ऐसे मामलों की जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया था। इस सम्मेलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने हिस्सा लिया था।
‘जेन जी आंदोलन: पीढ़ी की एकजुटता और प्रतिरोध’ शीर्षक वाले इस सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने समेत विभिन्न मांगों पर चर्चा हुई।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के बाहर के नेताओं की कथित मौजूदगी को लेकर विरोध जताया और सवाल उठाया कि क्या इस कार्यक्रम को प्रशासन से अनुमति मिली थी।


