
जमशेदपुर : छंद माल्य सप्त ऋषि का आयोजन सोमवार को बडे़ धूमधाम से लौहनगरी जमशेदपुर स्थित तुलसी भवन के मानस सभागार में हुआ। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि कविता ईश्वरीय वरदान है, जिस पर ईश्वर की विशेष कृपा होती है, उसे कविता का वरदान प्राप्त होता है। डा पांडेय ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने लिखा है कि कविता मनुष्यता की उच्च भूमि है। आधुनिक युग के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि डा गोपाल दास नीरज ने लिखा है कि
आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य।
मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य।
आज हम सभी छंद माल्य के सौजन्य से सौभाग्य के दरबार में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कविता तीन वर्णों के संयोग से बनती है-
क=कल्पना
वि=विचार
ता=तालमेल
अर्थात् कविता कल्पना और विचार का समानुपातिक रागात्मक भावाभिव्यक्ति है। कविता के चार अवयव है-छंद, राग, भाव और शैली (शिल्प)छंद कविता का प्राण तत्व है। आदि कविता महर्षि वाल्मीकि मुखारविंद से अनायास अनुष्टुप छंद में प्रस्फुटित हुई :-
मा निषाद प्रतिष्ठामं, त्वगम:शाश्वती समा:।
यत्क्रौंच मिथुनादेकमवधी काम मोहितम्।
डॉ पांडेय ने दोहा छंद में अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करते हुए कहा कि:-
छंद माल्य है कविता का, सदा रहा आधार।
बिना छंद के कविता तो होती है बेकार।
छंद माल्य ही प्राण है, कविता का आधार।
बिना छंद के सूना है, कविता का संसार।
समारोह की अध्यक्षता करती हुई झारखंड की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ ममता बनर्जी मंजरी ने कहा कि छंदमाल्य कार्यक्रम अपने आप में अनूठा और अद्वितीय है और एतदर्थ छंद माल्य की संकल्पिका और संयोजिका डा प्रतिभा प्रसाद कुमकुम बधाई की पात्र हैं। वहीं, कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ प्रसेनजित तिवारी, डॉ सुभाष चंद्र मुनका, डॉ विद्यासागर लाभ और डॉ रागिनी भूषण ने अपने सारगर्भित उद्बोधन से संगोष्ठी में चार चाद लगाया। इस सप्तम छंद माल्य में जिन कवि -कवयित्रियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया उनमें डॉ प्रतिभा प्रसाद कुमकुम, मनीषा सहाय सुमन, डॉ रजनी रंजन, रीना सिन्हा सलोनी, ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र, बिंदु प्रसाद रिद्धिमा, प्रतिमा त्रिपाठी, डॉ आशा गुप्ता, शिप्रा सैनी, लक्ष्मी सिंह रूबी, डा निर्मला कर्ण, मंजु भारद्वाज, पूनम सिन्हा, नीलम परीवाला, पद्मा प्रसाद, पूनम शर्मा स्नेहिल, रीना गुप्ता, सविता सिंह मीरा,पूनम सिंह, अनिता अग्रवाल तथा उषा झा प्रमुख हैं। कार्यक्रम में डॉ जंगबहादुर पांडेय ने डॉ प्रतिभा प्रसाद को थावे विद्यापीठ की विद्यासागर(डी लिट्)की मानद उपाधि तथा हिंदी रत्न सम्मान से और डा प्रसेन जित तिवारी को कर्मवीर सम्मान से सम्मानित किया, जिसका श्रोताओं ने करतल ध्वनि से अनुमोदन किया। डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अपनी पुस्तक भगवान हनुमान की प्रति डॉ प्रतिभा प्रसाद, डॉ सुभाष चंद्र मुनका और डॉ यमुना तिवारी व्यथित को दी।छंद माल्य सप्तम भारत की अजेय वीरांगनाओं पर केंद्रित था। इस अवसर पर प्रकाशित पुस्तक अजेय वीरांगनाएं और झारखण्ड के 25 वर्ष पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डॉ प्रतिभा प्रसाद ने, संचालन संयुक्त रूप से डॉ मनीषा सहाय सुमन एवं डॉ रजनी रंजन ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ रीना सिन्हा सलोनी ने किया। इसके बाद खुला मंच का आयोजन हुआ, जिसमें अनेकानेक कवि-कवयित्रियों ने अपनी कविता की अमृत धारा प्रवाहित की, जिसमें सभी श्रोताओं ने अवगाहन किया, उनमें आरा से आये डॉ राजेंद्र प्रसाद, टाटा के डॉ यमुना तिवारी व्यथित, डॉ सरोज कुमार सिंह मधुप, डॉ के एन शर्मा गाजीपुरी, डॉ रागिनी भूषण, डॉ बलवेंद्र सिंह, डॉ मनीला कुमारी, डॉ छाया सिंह, डॉ राजदेव सिन्हा, डॉ राजीव नयन पांडेय आदि प्रमुख हैं। राष्ट्र गान और शांति पाठ से कार्यक्रम की पूर्णाहुति हुई।
