
रांची: झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने इस मामले में कड़ा विरोध जताया है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है और उनके श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर 13 मार्च 2026 को रांची के डोरंडा स्थित श्रम भवन में कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना भी दिया था। खास बात यह रही कि इस दौरान भी आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई थीं।
कर्मचारियों पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
संघ के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों को बिना किसी सूचना के नौकरी से हटा दिया गया और कई लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
प्रशासन से बातचीत और समझौता
19 मार्च को संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद 23 मार्च को हुई बैठक में यह सहमति बनी कि कर्मचारियों का जवाब मिलने के बाद कार्रवाई पर दोबारा विचार किया जाएगा और हटाए गए कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लिया जाएगा।
समझौते के पालन पर सवाल
संघ का आरोप है कि सम्मान फाउंडेशन इस समझौते का पालन नहीं कर रहा है। कर्मचारियों को डराने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं, बिना सूचना के निलंबन किया जा रहा है और कई लोगों का जिला बदल दिया गया है।
आंदोलन की चेतावनी
नीरज तिवारी ने साफ कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे। अगर जल्द ही सभी फैसले वापस नहीं लिए गए तो पूरे राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा ठप करने का कदम उठाया जा सकता है। संघ ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से हस्तक्षेप कर जल्द न्याय दिलाने और कर्मचारियों की बहाली की मांग की है।

