झारखंड कोल्हान विश्वविद्यालय की टॉपर छात्रा का गोल्ड मेडल लेने से इनकार, जानें वजह

News Aroma Media
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चाईबासा: चाईबासा स्थिति कोल्हान विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह के दौरान उस समय उहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक टॉपर छात्रा ने गोल्ड मेडल और प्रमाण पत्र लेने से इनकार कर दिया।

छात्रा को मेडल लेने के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया था।

शुक्रवार को दीक्षांत के मुख्य अतिथि कुलाधिपति सह राज्यपाल रमेश बैस छात्रा के गले में मेडल पहनाने वाले थे। ठीक इससे पहले छात्रा ने हाथ जोड़कर मेडल लेने से इनकार कर दिया। छात्रा अपने हाथ में एक मांग पत्र लेकर पहुंची हुई थी।

वह राज्यपाल को अपना पत्र सौंपना चाहती थी लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने दोबारा छात्रा को राज्यपाल के पास जाने से रोक दिया। साथ ही छात्रा के हाथ से मांग पत्र लेकर फाड़ दिया गया।

राज्यपाल के सामने ही मंच पर अपना विरोध व्यक्त किया

इसके बाद छात्रा ने राज्यपाल के सामने ही मंच पर अपना विरोध व्यक्त किया। बताया कि वह विश्वविद्यालय में सभी छात्र-छात्राओं को एक साथ प्रमाण पत्र नहीं देने के निर्णय का विरोध कर रही है। छात्रा का आरोप था कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के बीच भेदभाव कर रहा है।

छात्रा भी एआइडीएसओ नामक छात्र संगठन से जुड़ी हुई है।

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में पहली बार सभी छात्र-छात्राओं को एक मंच पर प्रमाण पत्र नहीं देने का निर्णय लिया गया था।

अलग-अलग कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के लिए प्रमाण पत्र वितरण के लिए अलग-अलग महाविद्यालयों में प्रमाण पत्र वितरण की व्यवस्था की गई थी।

इसको लेकर कुछ छात्र संगठन लगातार विरोध कर रहे थे। बताया जा रहा है कि विरोध करने वाली छात्रा भी एआइडीएसओ नामक छात्र संगठन से जुड़ी हुई है। वह लंबे समय से विश्वविद्यालय के निर्णय के विरोध में कर रही थी।

छात्रा ने अर्थशास्त्र विषय में 2016-18 सत्र में एमए किया है

छात्रा का नाम सोनी गुप्ता है। छात्रा ने अर्थशास्त्र विषय में 2016-18 सत्र में एमए किया है। वह कोल्हान विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालय जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज की स्टूडेंट रही है।

पिछले सत्र में अपने विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के लिए छात्रा का चयन गोल्ड मेडल के लिए हुआ था। मुख्य समारोह पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में आयोजित किया गया था। मुख्य समारोह में ही विवाद हो गया।

छात्रों का आरोप था…

कोल्हान विश्वविद्यालय ने कई प्राइवेट कॉलेजों में सरकारी कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र देने के लिए भेजा था।

छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्राइवेट कॉलेजों का प्रचार प्रसार करने के लिए यह तरीका अपना रहा है।

वहीं विवि का कहना था कि कोविड के कारण भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग केंद्रों पर दीक्षांत समारोह की तरह कार्यक्रम कर प्रमाण पत्र वितरण की व्यवस्था की गई थी।

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