

रांची: 18 वर्षीय युवती के गायब होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बोकारो एसपी की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इस मामले को सीबीआई को क्यों नहीं सौंपा गया। साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय करते हुए एसपी से इस पर स्पष्ट जवाब देने को कहा है।





मामले की पृष्ठभूमि और गंभीरता
यह मामला वर्ष 2020 का है, जब बोकारो में एक युवती के लापता होने की प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच के दौरान वर्ष 2021 में यह बात सामने आई कि युवती की हत्या हो चुकी है। इसी गंभीरता को देखते हुए कोर्ट इस मामले को लेकर काफी चिंतित है और लगातार निगरानी कर रहा है।
सुनवाई में क्या हुआ
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने बोकारो एसपी से पूछा कि युवती लंबे समय से गायब है, ऐसे में उसे खोजने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। एसपी ने कोर्ट को बताया कि कई जगहों पर छापेमारी की गई है और एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिसका नार्कोटिक्स टेस्ट कराने की प्रक्रिया चल रही है।
नई जानकारी और पुलिस की कार्रवाई
युवती की मां की ओर से इस मामले में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की गई है। जानकारी के अनुसार, युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस मामले में बोकारो के पिंड्राजोड़ा थाना में केस दर्ज है। 11 दिसंबर 2025 को परिजनों को एक कॉल आया था, जिसमें बताया गया कि युवती पुणे में है। पुलिस ने कॉल करने वाले युवक को पकड़ा, जिसने बताया कि युवती उसके दोस्त के पास है।
जांच में अब तक नतीजा नहीं
पुलिस टीम युवती के पिता के साथ पुणे जाने के लिए निकली थी, लेकिन रास्ते में आरोपी युवक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद से अब तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
