झारखंड में इरफान अंसारी बनाम बीजेपी! ‘चेहरा चमक रहा था’ बयान पर बवाल, बर्खास्तगी की मांग से गरमाई सियासत

झारखंड में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के कथित बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर बर्खास्तगी की मांग करते हुए सियासत को गर्मा दिया

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डेस्क: झारखंड की राजनीति में उस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के एक कथित बयान को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद गीता कोड़ा और पार्टी प्रवक्ता राफिया नाज़ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाए। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि इरफान अंसारी ने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिससे पूरे महिला समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। पार्टी का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी मंत्री पर इस तरह के बयान देने के आरोप लगते रहे हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला

यह विवाद तब शुरू हुआ जब रांची में एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान इरफान अंसारी ने राज्यसभा चुनाव को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी और बीजेपी विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के महिला विधायकों का “चेहरा चमक रहा था।” इसी बयान को लेकर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि मंत्री का कहना है कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका मकसद किसी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने अपने बयान में स्थानीय नेतृत्व और झारखंड के स्वाभिमान की बात भी उठाई। अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।

बीजेपी ने की कार्रवाई की मांग

बीजेपी नेताओं ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताया है। गीता कोड़ा ने कहा कि “चेहरे की चमक” जैसे शब्दों का इस्तेमाल महिला विधायकों के लिए करना शर्मनाक है। यह सीधे तौर पर महिलाओं का अपमान है। प्रवक्ता राफिया नाज़ ने भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है, मुख्यमंत्री को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि इरफान अंसारी अपने बयानों से मातृशक्ति का अपमान कर रहे हैं। इसका राजनीतिक असर आने वाले चुनावों में दिखेगा। बीजेपी ने इस पूरे मामले को महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए मंत्री को पद से हटाने की मांग की है।

इरफान अंसारी का जवाब और सफाई

विवाद बढ़ने के बाद मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उनका कहना है कि वह हमेशा स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात करते रहे हैं। उन्होंने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज कर बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना सही नहीं है। उन्होंने संगठन और झारखंड के स्वाभिमान की बात दोहराते हुए कहा कि राजनीति सिर्फ धनबल से नहीं चलती, बल्कि संघर्ष और समर्पण से चलती है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता दीपक प्रकाश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करने वालों का सम्मान होना चाहिए।

राजनीति में नया तनाव

इस पूरे विवाद ने झारखंड की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार पर लगातार हमला बोल रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे बयान की गलत व्याख्या बता रहा है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।