
रांची : कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि केन्द्र सरकार की ग़लत विदेश नीति और नाकाम आर्थिक फैसलों से देश की जनता बदहाल और परेशान है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किये गये हमले और उसके बाद मध्य-पूर्व एशिया में उत्पन्न नाजुक स्थिति से भारत के आम लोगों पर पड़नेवाले दुष्प्रभाव से बचाव के लिए कोई कदम नहीं उठाया जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
केन्द्र सरकार की फैसले के विरोध में रिक्शे से विधानसभा पहुंची कृषि मंत्री
केन्द्र सरकार के अनेक अदूरदर्शी फैसलों के विरोध में शुक्रवार को शिल्पी नेहा तिर्की विधानसभा के चालू सत्र में भाग लेने के लिये रिक्शे से पहुंची। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कायम स्थिति ने भारतीय अर्थव्यवस्था और मोदी सरकार की पोल-पट्टी खोलकर रख दी है। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि केन्द्र सरकार की विदेश नीति न केवल बुरी तरीके से असफल हुई है बल्कि अर्थव्यवस्था भी बदहाली के कगार पर है। कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान मुद्दों पर पूरी देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित करने और मोदी सरकार की आंख खोलने के लिये आज उन्होंने झारखंड विधानसभा के चालू सत्र में भाग लेने के लिये रिक्शे पर आने का निर्णय लिया।
केन्द्र सरकार की ग़लत विदेश नीति और नाकाम आर्थिक फैसलों की तीखी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई ने देश की जनता की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की कीमतें आसमान छू रही है लेकिन केन्द्र में बैठे लोग जनता की तकलीफ से बेखबर हैं। बढ़ती महंगाई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन को उन्होंने केन्द्र को जनता की ओर से दी गई चेतावनी बताया और कहा कि अगर पेट्रोल, डीज़ल और गैस के दाम तुरंत कम नहीं हुए एवं गैस की उपलब्धता सुलभ नहीं हुई तो ये आंदोलन और बड़ी एवं व्यापक होगी।
पेट्रोल-डीज़ल की मार, जनता हो रही लाचार, महंगा पेट्रोल-डीज़ल, कैसे चलेगा देश का व्हील?, गैस सिलेंडर हुआ महंगा, रसोई का बजट हुआ तंग, ईंधन की बढ़ती कीमतें, जनता पर भारी मुसीबतें, पेट्रोल-डीज़ल कम करो, जनता को राहत दो, महंगी गैस-महंगा तेल, आम आदमी हुआ फेल, ईंधन संकट पर ध्यान दो, जनता को आसान जीवन दो, पेट्रोल-डीज़ल की कीमत कम करो, जनता का बोझ कम करो जैसे स्लोगन की चर्चा करते हुए श्रीमती तिर्की ने कहा कि आज उनके पास कहने को बहुत कुछ नहीं है बल्कि केवल हकीकत बयां करनेवाला वे स्लोगन लिखे कागज हैं जिसमें आज अपने देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति के कारण कायम अपने देश के हालात लिखे हैं।
