
Jharkhand News: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने मंगलवार को होने वाली आदिवासी परामर्शदातृ समिति (TAC) की बैठक को लेकर झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
DSP की परंपरा तोड़ने का आरोप
चंपाई सोरेन ने कहा कि टीएसी का गठन हमेशा राज्यपाल के संरक्षण में होता रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस लोकतांत्रिक परंपरा को तोड़कर गलत मिसाल कायम की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टीएसी आदिवासियों के हितों के लिए बनी है, तो इसकी बैठकों से ठोस परिणाम क्यों नहीं निकलते?
उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार के बहुमत के बावजूद पंचायत (पेश) और आदिवासी मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जो सरकार के ढुलमुल रवैये को दर्शाता है।
शराब दुकानों के प्रस्ताव का कड़ा विरोध
सोरेन ने खुलासा किया कि मंगलवार की टीएसी बैठक में आदिवासी बहुल गांवों में शराब दुकानों और बार के लिए लाइसेंस देने का प्रस्ताव शामिल है। इसका कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सामाजिक यात्रा नशा विरोधी आंदोलन से शुरू हुई थी।
वे ऐसी किसी बैठक में शामिल नहीं हो सकते, जो झारखंड की युवा पीढ़ी को नशे की ओर धकेलने वाले फैसले ले। उन्होंने स्पष्ट कहा, “ऐसे दस्तावेजों पर मुहर लगाने वाली बैठक में मेरी सहभागिता संभव नहीं है।”
सियासत में नई बहस छिड़ी
चंपाई सोरेन के इस बयान ने झारखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है। टीएसी की निष्पक्षता, उसकी भूमिका और सरकार की नीतियों पर नई बहस शुरू हो गई है। यह मुद्दा आदिवासी समुदाय और राज्य की सियासत में लंबे समय तक चर्चा का केंद्र रह सकता है।
