मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस

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रांची: हाई कोर्ट ने एससी-एसटी के एक मामले बेल पीटिशन की सुनवाई करते हुए हेमंत सोरेन को नोटिस भेजा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऋषिकेश कुमार के खिलाफ एसटी-एससी मामले को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था। अब ऋषिकेश कुमार ने मामले में बेल पिटीशन फाइल की है।

बेल पीटिशन की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सेक्शन 15A (3) और पांच (5) के तहत हेमंत सोरेन को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने सोरेन को बतौर मुख्यमंत्री नोटिस नहीं दिया है। हेमंत सोरेन का यह मामला निजी है।

झारखंड सरकार का इससे कोई ताल्लुक नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि चूंकि हेमंत सोरेन मामले में विक्टिम हैं।

ऐसे में कोर्ट के सामने वो अपनी दलील रखें। कोर्ट ने कहा है कि यह नोटिस फैक्स के माध्यम से झारखंड के मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी जाए।

साथ ही एक प्रति झारखंड के डीजीपी को भी भेजी जाए। मामले पर दोबारा सुनवाई दो हफ्ते के बाद होगी।

क्या है मामला

बता दें कि सोशल मीडिया पर गढ़वा के ऋषिकेश कुमार ने मुख्यमंत्री को अपमानजनक शब्द कहा था। उसी मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री को अपमानजनक शब्द कहने पर गढ़वा थाना में एससी-एसटी के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उसी मामले के आरोपी ऋषिकेश कुमार की जमानत याचिका निचली अदालत से खारिज होने के बाद झारखंड हाई कोर्ट में दायर की गई थी। उस याचिका पर सुनवाई के उपरांत अदालत ने मुख्यमंत्री को मामले में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया था।

मुख्यमंत्री की ओर से अभी तक अपना पक्ष नहीं रखा गया, जिस पर फिर से 2 सप्ताह में पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई की हुई 

झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार की अदालत में इस मामले में आरोपी ऋषिकेश कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई।

न्यायाधीश ने अपने आवासीय कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई की। वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता और सरकार के अधिवक्ता ने अपने अपने आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा।

अदालत ने मामले में पूर्व में दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत एससी-एसटी एक्ट में दिए गए प्रावधान के आलोक में मुख्यमंत्री को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से पक्ष नहीं रखे जाने के बाद अदालत ने उन्हें फिर से अपना पक्ष रखने का समय दिया है।

2 सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश

बता दें कि गढ़वा के ऋषिकेश कुमार ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को अपमानजनक शब्द कहा था। उसी मामले में गढ़वा थाने में एससी-एसटी के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

उस मामले में आरोपी ने गढ़वा की निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की। निचली अदालत ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। उसके बाद उसने झारखंड हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर जमानत की गुहार लगाई।

उसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत पीड़ित पक्ष को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से अपना पक्ष नहीं रखे जाने के बाद फिर से उन्हें 2 सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

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