रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले और अनियमितता का मामला अब करीब 13 साल बाद अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस बहुचर्चित मामले में सीबीआई की ओर से गवाही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद समेत कुल 20 आरोपियों के बयान सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज किए जा चुके हैं। सीबीआई इस मामले में कुल 24 गवाहों की गवाही पूरी करा चुकी है और अब इसके आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही फैसले की उम्मीद है।

यह पूरा मामला झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के अनुरोध पर जेपीएससी द्वारा विज्ञापन संख्या 14/2006 के माध्यम से आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के 235 पदों पर नियुक्ति के लिए शुरू की गई प्रक्रिया से जुड़ा है। इसके लिए 15 अप्रैल 2007 को परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें सामान्य हिंदी और सामान्य अध्ययन (100-100 अंकों) के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की गई थी। जांच के दौरान जेपीएससी द्वारा उपलब्ध कराए गए 301 सफल अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तरपुस्तिकाओं में कथित अनियमितताएं सामने आईं। आरोप था कि कुछ अभ्यर्थियों ने कम प्रश्न हल किए थे, लेकिन मेरिट लिस्ट में उन्हें अधिक अंक देकर सफल घोषित कर दिया गया और आवासीय विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त कर दिया गया, जिससे कई योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए।
इस मामले में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद, सदस्य डॉ. गोपाल प्रसाद सिंह, डॉ. शांति देवी, डॉ. राधा गोविंद सिंह नागेश, तत्कालीन सचिव सह परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी सिंह, संतोषजी आनंदजी, राजीव रंजन, जितेंद्र कुमार सिंहदेव, सिकंदर मांझी, दुर्गावती कुमारी, सज्जाद अंसारी, पूनम तिग्गा, सुषमा पॉल पूर्ति, नेलन होरो बारला, सुरलेन कच्छप, एलिजाबेथ खलखो, जिसवंती डेमता, जमील अख्तर अंसारी, प्रमीला डाडेल, प्रतिमा एक्का और धीरज कुमार ट्रायल का सामना कर रहे हैं। इन पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा चल रहा है। मामले में जल्द ही बहस शुरू होने की संभावना है।


