रांची : भगवान शिव की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाया जायेगा। यह पर्व प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है भगवान शिव की महान रात्रि। यह दिन भगवान शिव की आराधना, उपवास, जप, तप और ध्यान के लिए समर्पित माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह विवाह केवल दो दिव्य शक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के एकत्व का प्रतीक है। दूसरी मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले विष ‘हलाहल’ को भगवान शिव ने ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की थी। उनके इस त्याग और करुणा के स्मरण में भी महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार इसी रात्रि भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।महाशिवरात्रि का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत गहरा है। यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और साधना का संदेश देता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन और शिव पुराण का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव उपासना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति तथा शक्ति प्राप्त होती है।महाशिवरात्रि हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में त्याग, तपस्या और संतुलन का कितना महत्व है। भगवान शिव को संहारक भी कहा जाता है, परंतु उनका संहार नकारात्मकता और अज्ञान का होता है। अतः यह पर्व बुराइयों का त्याग कर सद्गुणों को अपनाने का प्रेरक संदेश देता है।इस प्रकार महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मजागरण और आध्यात्मिक उन्नति का महापर्व है, जो श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से मानव को ईश्वर के निकट ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।




