ममता कालिया को 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार, ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिला सम्मान

हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया को 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके चर्चित संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिलेगा, जिससे प्रयागराज में साहित्य प्रेमियों में खुशी का माहौल है।

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प्रयागराज: हिंदी साहित्य की जानी-मानी लेखिका ममता कालिया को वर्ष 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके चर्चित संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए दिया जाएगा। इस खबर से प्रयागराज में साहित्य प्रेमियों के बीच खुशी का माहौल है। साहित्य अकादमी की ओर से इस पुरस्कार की घोषणा के बाद हिंदी साहित्य जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई है। ‘जीते जी इलाहाबाद’ में ममता कालिया ने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक जीवन की यादों को बेहद सहज और जीवंत तरीके से पेश किया है। यह कृति सिर्फ शहर की साहित्यिक परंपरा का दस्तावेज नहीं है, बल्कि उस दौर के रचनात्मक माहौल और लेखकों के जीवन की झलक भी पाठकों को देती है। उनकी लेखनी की संवेदनशीलता और विशिष्ट शैली ने इसे पाठकों और समीक्षकों दोनों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

‘जीते जी इलाहाबाद’ में शहर की साहित्यिक स्मृतियां

इस संस्मरण में लेखक ने इलाहाबाद की साहित्यिक दुनिया, लेखक साथियों के जीवन और शहर के सांस्कृतिक परिवेश को विस्तार से पेश किया है। यह केवल व्यक्तिगत अनुभवों का संग्रह नहीं है, बल्कि शहर के बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन का दस्तावेज भी माना जाता है। कृति में शहर की साहित्यिक परंपरा, लेखकों के आपसी संबंध और साहित्यिक गतिविधियों का जीवंत वर्णन मिलता है। इसने पाठकों को उस दौर की साहित्यिक दुनिया का अनुभव कराने में सफलता पाई है।

हिंदी साहित्य में ममता कालिया का योगदान

ममता कालिया हिंदी की प्रमुख कथाकार, उपन्यासकार और नाटककार हैं। उनके लेखन में सामाजिक यथार्थ, मध्यवर्गीय जीवन, स्त्री अनुभव और बदलते सामाजिक परिवेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उनकी रचनाएं सरल भाषा, व्यंग्यात्मक शैली और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों के कारण पाठकों में हमेशा लोकप्रिय रही हैं। हिंदी कथा साहित्य में उनका योगदान लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

साहित्य अकादमी पुरस्कार का महत्व

साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत का प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है। यह पुरस्कार देश की विभिन्न भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है। यह लेखकों को प्रोत्साहित करने और साहित्यिक परंपरा को मजबूत बनाने का एक प्रमुख मंच है। ममता कालिया के साहित्यिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से हिंदी साहित्य में उनकी प्रतिष्ठा और भी मजबूत हुई है।

 

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।