मंत्री नवाब मलिक ने हाई कोर्ट की अवमानना मामले में मांगी बिना शर्त माफी

News Aroma Media
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मुंबई: महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री नवाब मलिक ने हाई कोर्ट की अवमानना मामले में शुक्रवार को बिना शर्त माफी मांग ली।

मलिक ने इसी के साथ अपने माफी पत्र में यह भी कहा कि वे केंद्रीय अधिकारियों के गलत व्यवहार और उनके राजनीतिक उपयोग पर आवाज उठाते रहेंगे।

हाई कोर्ट के जस्टिस शाहरुख काथावाला और जस्टिस मिलिद जाधव की खंडपीठ ने 7 दिसंबर को ज्ञानदेव वानखेड़े के आवेदन पर नवाब मलिक को अदालत की अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

इसका रिप्लाई शुक्रवार तक फाइल करने का आदेश नवाब मलिक को दिया गया था।

नवाब मलिक ने आज चार पेज का रिप्लाई फाइल किया। इस रिप्लाई में नवाब मलिक ने कहा कि ज्ञानदेव वानखेड़े ने जो तीन बयान का जिक्र यहां किया है वह उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पर दिया है।

पत्रकार परिषद में जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उसका जवाब देते समय यह वक्तव्य उन्होंने दिया । उन्हें नहीं लगा था कि उससे कोर्ट की अवमानना होगी। लेकिन अगर ऐसा है तो वे बिना शर्त माफी मांगते हैं और आगे इस तरह का बयान नहीं देंगे।

नवाब मलिक ने अपने पत्र में कहा है कि इसका अर्थ यह नहीं माना जाए कि वे केंद्रीय जांच एजेंसियों के राजनीतिक उपयोग और उनके अधिकारियों के गलत कामकाज पर नहीं बोलेंगे।

हाई कोर्ट ने नवाब मलिक की रिप्लाई को स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्रवाई न करने का निर्णय लिया है।

उल्लेखनीय है कि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(एनसीबी) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े की जाति का मुद्दा नवाब मलिक ने उठाया था और उनपर मुस्लिम होते हुए दलित कोटे से नौकरी करने का आरोप लगाया था।

इसके बाद समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने नवाब मलिक पर 1.25 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया है।

इसी मुकदमे की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नवाब मलिक को वानखेड़े परिवार के विरुद्ध कोई भी व्यक्तव्य जारी न करने का आदेश जारी किया था।

लेकिन 6 दिसंबर को नवाब मलिक ने कहा था कि समीर वानखेड़े पहले उनके साथ नमाज पढ़ा करते थे , इसके बाद भी उन्होंने (समीर वानखेड़े ) ने उनके दामाद को झूठे मामले में फंसाया, ताकि मैं उनके मुसलमान होने की बात न कर सकूं।

इसी बयान को अदालत की अवमानना बताते हुए समीर के पिता ज्ञानदेव ने 7 दिसंबर को हाई कोर्ट में आवेदन दिया था और हाई कोर्ट ने नवाब मलिक को कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए कहते हुए शुक्रवार तक रिप्लाई फाइल करने का आदेश दिया था।

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