बिहार में मेयर बनना है तो दो से अधिक बच्चे होना मना,जानिए क्यों चली गई इनकी कुर्सी..

मतलब- बच्चे को गोद देने के बाद भी वो चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ही रहेंगे, हालांकि, अगर एक ही बार में जुड़वा या इससे ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं तो नियम में बदलाव होगा

News Aroma Media
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Rules for Mayor: मेयर के पद (Mayor’s Office) की मान्यता  सभी को पता है। पर मेयर बनना हर किसी की किस्मत में नहीं। लेकिन ये मामला ऐसा है कि मेयर तो बने पर बच्चों के कारण पद हाथ से चला गया।

बिहार की राखी गुप्ता (Rakhi Gupta) सुर्खियों में हैं। वो छपरा नगर निगम की मेयर थीं। लेकिन तीन बच्चों की मां होने के कारण उनकी कुर्सी चली गई।

दरअसल, उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे (Election Affidavit) में दो बच्चों का ही जिक्र किया था और एक को छिपा लिया था। उनके हलफनामे को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग में केस दर्ज कराया गया।

धोके से बनी मेयर

बता दें कि दिसंबर 2022 में राखी ने छपरा नगर निगम से मेयर का चुनाव जीता था। इस दौरान उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में सिर्फ दो बच्चियों का ही जिक्र किया था।

जबकि, छपरा रजिस्ट्री ऑफिस से मिले कागजात के अनुसार उनके तीन बच्चे निकले। राखी ने हलफनामे में तीसरे नंबर की संतान का जिक्र नहीं किया।

गया हाथ से मेयर का पद

हालांकि, राखी का कहना है कि उन्होंने अपने तीसरे बच्चे को एक निःसंतान रिश्तेदार (Childless Relative) को लिखित रूप से गोद दे दिया था। ऐसे में कानूनी रूप से उनके दो ही बच्चे हैं। लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने नियम का हवाला देते हुए राखी की मेयर पद की सदस्यता रद्द कर दी।

मेयर की कुर्सी पाने के नियम

बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 (Bihar Municipality Act 2007) की धारा 18 (1) (AM) के मुताबिक, अगर किसी नागरिक को 4 अप्रैल, 2008 के बाद तीसरी संतान हुई, तो वह नगरपालिका निर्वाचन में चुनाव नहीं लड़ सकता है।

इस अधिनियम में ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि दो से अधिक संतान वाले लोग अगर किसी को बच्चा गोद दे देते हैं तब भी वो उस बच्चे के जैविक माता-पिता माने जाएंगे।

मतलब- बच्चे को गोद देने के बाद भी वो चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ही रहेंगे। हालांकि, अगर एक ही बार में जुड़वा या इससे ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं तो नियम में बदलाव होगा।

किसने कर दी शिकायत

नगर पालिका अधिनियम 2007 (Municipal Act 2007) के इसी नियम के तहत छपरा नगर निगम की पूर्व मेयर सुनीता देवी ने राखी गुप्ता के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग में शिकायत की थी।

पांच महीने की सुनवाई के बाद बीते गुरुवार को मामले में फैसला आया और अखिरकार राखी की सदस्यता चली गई। हालांकि, फैसले के खिलाफ राखी ने अब हाईकोर्ट (High Court) का रुख किया है।

रिश्तेदार को गोद दिया तीसरे संतान को

राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि राखी ने हलफनामे में 4 अप्रैल 2008 के बाद पैदा हुए अपने तीसरे बच्चे की जानकारी छुपाई थी।

उन्होंने सिर्फ अपनी दो बेटियों की ही जानकारी दी थी। इस तरह उन्होंने नगर पालिका अधिनियम 2007 (Municipality Act 2007) का उल्लंघन किया था।

खुद छपरा जिलाधिकारी द्वारा आयोग को यह जानकारी दी गई थी कि राखी गुप्ता और उनके पति वरुण प्रकाश ने अपने तीसरे पुत्र श्रीश प्रकाश (6) को अपने निःसन्तान रिश्तेदार को कानूनी रूप से गोद दिया था। उस गोदनामे में बायोलॉजिकल माता-पिता (Biological Parents) के रूप में राखी और वरुण का नाम लिखा है।

Share This Article