
रांची : झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राम मनोहर लोहिया जयंती हर वर्ष 23 मार्च को मनाई जाती है। यह दिन भारत के महान समाजवादी चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर वक्ता डॉ. लोहिया के जन्म (23 मार्च 1910) की स्मृति में समर्पित है। डॉ लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर मे हुआ था।
डॉ लोहिया जयंती के अवसर पर देशभर में उनके विचारों, सिद्धांतों और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है।डॉ. राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन बाद में समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने के लिए स्वतंत्र मार्ग अपनाया। वे सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय और जातिवाद के विरोध के प्रबल समर्थक थे।लोहिया जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य उनके आदर्शों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना है।
उन्होंने “सप्त क्रांति” का सिद्धांत दिया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक और राजनीतिक असमानताओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब समाज विभिन्न प्रकार की असमानताओं से जूझ रहा है।डॉ. लोहिया का मानना था कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिले। उन्होंने ग्रामीण विकास, महिलाओं के अधिकार और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर विशेष जोर दिया। उनका जीवन सादगी, संघर्ष और जनसेवा का अद्भुत उदाहरण रहा है।लोहिया जयंती के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक मंचों पर विचार गोष्ठियों, सेमिनारों और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।आज के दौर में जब समाज में असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, तब डॉ. लोहिया के विचार मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उनका संदेश स्पष्ट था-समाज में न्याय, समानता और भाईचारे की स्थापना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।अतः लोहिया जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प दिवस है।

