जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में सीआईडी की जांच तेज, आरोपी रमेश कुमार ने परीक्षार्थियों से ऐंठे लाखों रुपये

जेपीएससी पीटी परीक्षा में कथित धांधली मामले में सीआईडी जांच तेज। रमेश कुमार पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलने, दस्तावेज रखने और गिरोह से संपर्क में रहने का आरोप।

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रांची: रांची में जेपीएससी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के मामले में सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सिंडिकेट के सदस्यों और बिचौलियों के नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में जोरहाट स्थित ‘धरती आबा’ संस्थान के कर्मचारी रमेश कुमार की भूमिका एक सक्रिय मध्यस्थ के रूप में उजागर हुई है। जांच के अनुसार, रमेश ने 11वीं-12वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा पास कराने का झांसा देकर कई अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये वसूले थे। उसने पहली बार में ही लगभग 40 लाख रुपये की वसूली की थी, जिसमें से अपना कमीशन काटकर बाकी 36 लाख रुपये मुख्य सरगना बुद्धेश्वर भगत को सौंप दिए थे।

जांच में यह बात भी सामने आई है कि रमेश अभ्यर्थियों को ब्लैकमेल करने और सुरक्षा के तौर पर उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और परीक्षा की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी अपने पास रख लेता था, ताकि बाद में कोई मुकरने या पैसे देने से पीछे हटने की हिम्मत न कर सके। आरोपी रोकी उर्फ सचिन लकड़ा के बयान से इस बात की पुष्टि हुई है कि उसने भी अपने मूल दस्तावेज और 10 लाख रुपये रमेश को दिए थे।

सीआईडी ने कार्रवाई करते हुए रमेश के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि रमेश गिरोह के मुख्य सदस्यों बुद्धेश्वर भगत, उमेश कुमार और अभय तिवारी के साथ लगातार संपर्क में था। सीआईडी अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शामिल अन्य नामजद और संलिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।