
रांची: शहर में ईसाई समुदाय का प्रमुख पर्व ‘खजूर पर्व’ 29 मार्च, रविवार को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। जिससे अंग्रेजी में पॉम संडे भी कहा जाता है। खजूर का पर्व इस बात का संदेश देते है कि अब लेट काल खत्म हो गया और प्रभु यीशु का आने का दिन करीब है । इस खास मौके पर शहर के प्रमुख चर्च जैसे संत मारिया महागिरजाघर, सीएनआई चर्च बहुबाजार और जीईएल चर्च के बाहर खजूर की डालियां बाजार में उपलब्ध कराई जा रही हैं। श्रद्धालु इन डालियों को खरीदकर पर्व की तैयारी में जुट गए हैं और पूरे माहौल में धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है।
बाजार में खजूर की डालियों की बढ़ी मांग
रांची के रेडियम रोड के दुकानदारों का कहना है कि वे खजूर की डालियां बेचने के लिए नहीं, बल्कि सेवा के रूप में लोगों को उपलब्ध कराते हैं। शहर में खजूर के पेड़ नहीं होने के कारण इन्हें बाहर से लाना पड़ता है। लोग अपनी इच्छा से दुकानदारों को पैसे देते हैं। ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए दुकानदार खजूर की पत्तियों से सुंदर फूल और क्रॉस बनाकर बेच रहे हैं। छोटी खजूर की डालियां 10 से 30 रुपये तक में मिल रही हैं।
धार्मिक महत्व और परंपरा
इस पर्व का धार्मिक महत्व भी बहुत खास है। श्रद्धालु खजूर की डालियों को घर लाकर दरवाजों और चर्च में रखते हैं। मान्यता है कि इससे घर में नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। चर्चों को भी खजूर की पत्तियों से सजाया जाएगा और इन्हीं डालियों से यीशु मसीह का स्वागत किया जाएगा।
आने वाले वर्ष की तैयारी भी जुड़ी
इस दिन इस्तेमाल की गई खजूर की डालियों को अगले साल तक संभालकर रखा जाता है। बाद में इन्हें जलाकर राख बनाई जाती है, जिससे ‘राख बुधवार’ की शुरुआत होती है। यह पर्व यीशु मसीह के यरुशलम आगमन की याद में मनाया जाता है।
श्रद्धा और उत्साह का माहौल
रांची में इस पर्व को लेकर लोगों में खास उत्साह है। बाजार से लेकर चर्च तक हर जगह तैयारियां जोरों पर हैं और लोग पूरे मन से इस धार्मिक आयोजन को मनाने के लिए तैयार हैं।
