
रांची : हिंदी साहित्य संकल्प संधान पीठ मोरहाबादी रांची के तत्वावधान में मां राजमणि सम्मान समारोह का आयोजन डा चंद्र कांत शुक्ला की अध्यक्षता में धूमधाम से हुआ। इस अवसर पर तीन साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। रांची की सुप्रसिद्ध कवयित्री और साहित्यकार डॉ वीणा श्रीवास्तव को लोक पूज्य राम छबीला त्रिपाठी वाग्देवी सम्मान, आकाश वाणी रांची की सेवा निवृत कार्यक्रम अधिशासी और नागपुरी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा शकुंतला मिश्रा को मां राजमणि स्यमंतकमणि सम्मान और हिंदी और भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ जितेन्द्र कुमार (आरा) को शहीद श्रीराम तिवारी कौस्तुभ मणि सम्मान से नवाजा गया। प्रत्येक सम्मान प्राप्त कर्ता को प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्रं, पुष्प गुच्छ के साथ साथ 11 हजार की नगद राशि प्रदान की गई। यह सम्मान समारोह विगत 2023 से झारखण्ड के सुप्रसिद्ध साहित्यकार और भोजपुरी के महाकवि डॉ हरेराम त्रिपाठी के जन्म दिन पर आयोजित होता है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पीजी कॉलेज गाजीपुर के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा राम नारायण तिवारी ने कहा कि सम्मान से रचनाकारों की रचनाधर्मिता सघन और गहन होती है। इससे उन्हें लेखन में बल एवं प्रोत्साहन मिलता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के पूर्व प्रतिकुलपति डा चंद्र कांत शुक्ल ने कहा कि यह झारखंड के लिए गौरव का संदर्भ है कि डॉ हरेराम त्रिपाठी चेतन के सौजन्य से ऐसा सम्मान समारोह आयोजित हो रहा है। इस अवसर पर डा राकेश रमण रार की सद्य:प्रकाशित कविता पुस्तक “वो जो छूट गया ” का मंचस्थ अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। डॉ जंग बहादुर पांडेय ने डॉ हरे राम त्रिपाठी को उनके 85 वें जन्मदिन पर उन्हें अंग वस्त्र, पुष्प गुच्छ तथा सुंदरकांड की प्रति देकर सम्मानित किया और उनके भास्वर एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
जीवन में पग पग पर आप,
करें कार्य नित मंगलकारी।
और सफल हों यश पावें,
यही कामना सदा हमारी।
इस अवसर पर डॉ सारिका भूषण ने डॉ वीणा श्रीवास्तव के, डा उमेश नंद तिवारी ने डॉ शकुंतला मिश्रा के और डॉ कनक किशोर ने डॉ जितेन्द्र कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर गहन प्रकाश डाला। सम्मानित साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाधर्मिता पर प्रकाश डाला। डॉ जितेन्द्र कुमार ने अपने आत्म कथ्य में कहा कि साहित्यकार सदैव लोकहित की बात करता है। जो साहित्य लोक हित के विरुद्ध है, वह साहित्य नहीं हो सकता है।विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए झारखंड साहित्य संस्कृति मंच के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि सम्मान से मान बढ़ता है और ऐसे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहने चाहिए।इस अवसर पर पत्रकार डॉ विनय कुमार पांडेय, राजेंद्र तिवारी, डॉ ओम प्रकाश प्रभृति विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डॉ हरे राम त्रिपाठी चेतन ने, मंगलाचरण डॉ माधवी उपाध्याय ने,सम्मान समारोह के इतिहास पर डा दिव्येंदु त्रिपाठी ने,कुशल संचालन कुमार बृजेन्द्र उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम की पूर्णाहुति राष्ट्र गान और शांतिपाठ से हुई।
