
रांची: सदर अस्पताल रांची में ‘विश्व सिकल सेल दिवस’ पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने बीमारी की रोकथाम और जांच के महत्व पर जोर दिया। इस साल का थीम ग्लोबल एक्शन लोकल इंपैक्ट: एंपावरिंग कम्युनिटीज फॉर इफेक्टिव सेल्फ एडवोकेसी पर चर्चा करते हुए सामाजिक भेदभाव को मिटाने का संकल्प लिया गया। इस कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि झारखंड की लगभग 8 से 10% आबादी करीब 32 लाख लोग में सिकल सेल का जीन मौजूद है, जबकि 1 से 2% लोग इस बीमारी से सीधे प्रभावित हैं। प्रभावित बच्चों में 5 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में मरीजों को हाथ-पैर और छाती में असहनीय दर्द, खून की कमी, थकान और बार-बार बुखार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गंभीर स्थिति में किडनी और फेफड़े भी प्रभावित हो सकते हैं।
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि जिले के सदर अस्पताल और सभी स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी जांच पूरी तरह निःशुल्क है। अब गर्भवती महिलाओं की एएनसी (ANC) जांच में भी सिकल सेल स्क्रीनिंग को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। डॉक्टरों ने अपील की है कि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए विवाह से पहले सिकल सेल की जांच जरूर कराएं। गर्भवती महिलाओं की पहली तिमाही में एचपीएलसी (HPLC) जांच होनी चाहिए। यदि पति-पत्नी दोनों पॉजिटिव हों, तो गर्भस्थ शिशु की विशेष जांच (CVS) और जेनेटिक काउंसलिंग कराई जानी चाहिए।
आईईसी सेल के नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह ने बताया कि यदि माता-पिता दोनों सिकल सेल ट्रेट से प्रभावित हैं, तो बच्चे में बीमारी होने की संभावना 25 प्रतिशत होती है।ब्लड सेल के नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि राज्य में जल्द ही एक विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 0 से 5 वर्ष और 18 से 35 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों की निःशुल्क जांच की जाएगी। सरकार मरीजों को मुफ्त ब्लड और जरूरी वैक्सीन भी उपलब्ध करा रही है। कार्यक्रम का समापन जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया।

