चुनाव आयोग पर RJD का बड़ा हमला! मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपात के गंभीर आरोप, कहा-बंगाल में SIR तो असम में क्यों नहीं?

राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया, बंगाल में SIR और असम में नहीं कराने पर सवाल उठाए, निष्पक्षता पर भरोसा जताया मुश्किल।

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रांची: राजद के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में विपक्ष के विरोध के बावजूद विवादास्पद SIR कराया गया, जिससे कई तरह के सवाल उठे हैं। कैलाश यादव ने बताया कि SIR को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में सैकड़ों याचिकाएं दाखिल की हैं, जो अब भी सुनवाई के लिए लंबित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता की कार्यशैली को लेकर विवाद बढ़ गया है। यादव के मुताबिक, बीजेपी के प्रति कथित पक्षपात को लेकर लोकसभा और राज्यसभा के करीब 193 सांसदों ने पहली बार महाभियोग प्रस्ताव लाया है।

बंगाल में SIR, असम में क्यों नहीं?

कैलाश यादव ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तेजी दिखाते हुए SIR कराया, लेकिन असम में ऐसा क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को इसका जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने पुराने चुनावी मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले असम चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उस समय वादा किया गया था कि सत्ता में आने के बाद घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। लेकिन अब 11 साल बाद भी वही मुद्दा चुनावों में उठाया जा रहा है और चुनाव आयोग इस पर चुप है, जो कई सवाल खड़े करता है।

असम में कार्रवाई क्यों नहीं?

कैलाश यादव ने कहा कि SIR का मुख्य उद्देश्य घुसपैठियों को पहचानकर बाहर करना बताया जाता है। ऐसे में जब यह मुद्दा असम से जुड़ा है, तो वहां SIR क्यों नहीं कराया गया? यह सवाल सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता पर उठता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में SIR के दौरान करीब 150 प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला किया गया, जबकि असम में एक भी अधिकारी का तबादला नहीं हुआ। राजद प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता के रहते हुए चुनाव की निष्पक्षता पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि महाभियोग प्रस्ताव पर निर्णय होने तक मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों पर रोक लगाई जानी चाहिए।

 

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।