रूपी सोरेन पंचतत्व में विलीन, कांग्रेस बोली-झारखंड आंदोलन की खामोश ताकत थीं गुरुजी की जीवनसंगिनी

रूपी सोरेन के निधन से झारखंड में शोक, कांग्रेस ने उन्हें झारखंड आंदोलन की खामोश ताकत बताया, संघर्ष और साहस से भरे जीवन को किया याद।

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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी रूपी सोरेन का बुधवार शाम रांची के हिल व्यू अस्पताल में निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं। पिछले कुछ समय से वह सांस लेने में परेशानी और किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। इस दुखद मौके पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता मृदुल राज ने गहरी संवेदना व्यक्त की।

‘सोरेन परिवार ने अपनी सबसे बड़ी मातृशक्ति खो दी’

शोक जताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मृदुल राज ने कहा कि रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार ने अपनी सबसे बड़ी स्नेहमयी मातृशक्ति को खो दिया है। उन्होंने कहा कि रूपी सोरेन केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां या गुरुजी शिबू सोरेन की पत्नी नहीं थीं, बल्कि झारखंड आंदोलन की वह खामोश ताकत थीं, जिसके बिना अलग राज्य की लड़ाई की कहानी अधूरी रहती। मृदुल राज ने कहा कि जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन महाजनी प्रथा के खिलाफ जंगलों और पहाड़ों में फरारी काट रहे थे, उस समय रूपी सोरेन ने अकेले घर, समाज और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली।

महाजन को हसुआ लेकर खदेड़ा

रूपी सोरेन के संघर्ष को याद करते हुए मृदुल राज ने कहा कि उनका पूरा जीवन साहस और संघर्ष की मिसाल रहा। आंदोलन के दौर में जब एक दबंग महाजन जबरन सोरेन परिवार के खेत को जोतने पहुंचा, तो रूपी सोरेन ने धान काटने वाला हसुआ उठा लिया और उसे वहां से खदेड़ दिया। उन्होंने कहा कि शादी के तुरंत बाद जब शिबू सोरेन हजारीबाग जेल में बंद थे और परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, तब रूपी सोरेन अपने मायके गईं, पिता से पैसे जुटाए और पति को जेल से रिहा कराने के लिए प्रयास किया। मृदुल राज ने कहा कि ऐसी जुझारू महिला का निधन पूरे जनजातीय समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।

1999 में दुमका से लड़ा लोकसभा चुनाव

कांग्रेस प्रवक्ता ने रूपी सोरेन की राजनीतिक दृढ़ता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1999 में अविभाजित बिहार के दौर में रूपी सोरेन ने दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया था। इस चुनाव में वह भाजपा के दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी से महज 4,648 वोटों के अंतर से पीछे रह गई थीं। मृदुल राज ने कहा कि यह मुकाबला सोरेन परिवार के प्रति संताल परगना के अटूट विश्वास को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन के निधन के बाद रूपी सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए सबसे बड़ा भावनात्मक सहारा थीं।

शोकाकुल परिवार के प्रति जताई संवेदना

मृदुल राज ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक बसंत सोरेन और कल्पना सोरेन समेत पूरे शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत रूपी सोरेन को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, उन्हें मोक्ष और परम शांति प्रदान करें तथा परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति दें।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।