भारतीय ज्ञान परंपरा में नमन और मनन का स्थान सर्वोपरि : डॉ. जंग बहादुर पांडेय

शेरशाह कॉलेज सासाराम की संगोष्ठी में डॉ जंग बहादुर पांडेय ने ज्ञान, संस्कृत और सफलता के महत्व पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन अपनाने की प्रेरणा दी।

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सासाराम : शेरशाह कालेज सासाराम के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में दूसरे दिन गुरुवार को बतौर मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए ज्ञान की प्राप्ति सर्वोपरि है। ज्ञान की प्राप्ति के लिए श्रद्धा, तत्परता और इन्द्रिय निग्रह अत्यावश्यक है। इंद्रियों का राजा मन को नियन्त्रित करने के लिए मन के पूर्व न लगाने से नमन और बाद में न लगाने से मनन शब्द बनेंगे। नमन+मनन = ज्ञान की प्राप्ति यानि सफलता और कामयाबी।डॉ. पांडेय ने कहा कि-
सूखी उम्मीदों की कोई डाली नहीं होती,
बन्द किस्मत की कोई ताली नहीं होती।
झुक जाए जो मां- बाप के चरणों में,
उसकी झोली कभी खाली नहीं होती।

कार्यक्रम में हॉल छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों से खचाखच भरा हुआ था। कार्यक्रम में जिन वक्ताओं ने अपने संबोधन से संगोष्ठी की गरिमा बढ़ायी, उनमें डॉ गुरु चरण सिंह, डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ शिव प्रसन्न सिंह, डॉ अनूप कुमार, डॉ अब्दुल, डॉ प्रेम प्रकाश, प्राचार्य डॉ अशोक कुमार, प्राचार्य डॉ विनोद कुमार सिंह, वृंदावन वासी बाबा हरिहर नाथ, डॉ चंद्रमा सिंह, डॉ तारामणि पाण्डेय, प्राचार्या डॉ अजरा परवीन, डॉ शशिकला, डॉ अल्पना श्रीवास्तव, डॉ मुनमुन दूबे, डॉ सरोज पाठक, डॉ जितेन्द्र तिवारी, डॉ असलम परवेज, डॉ बी बी श्रीवास्तव, डॉ मुस्तफा नाज, डॉ पुष्पा सिंह, प्राचार्या डॉ सुनीता कुमारी, जिज्ञासा कुमारी, नीलम कुमारी आदि प्रमुख हैं। डॉ मुनमुन दूबे ने संस्कृत में अपना उद्बोधन देकर सबका मन मोह लिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत हिंदी की जननी है और भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल स्त्रोत संस्कृत में है।

अतः संस्कृत का अध्ययन अध्यापन सबके लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए। डॉ जे बी पाण्डेय ने प्राचार्य डा महेंद्र नाथ पाण्डेय को उनकी कर्मठता के लिए कर्मवीर सम्मान और डा राकेश कुमार, डा दीपक कुमार, डा मृत्युंजय कुमार सिंह, डा केतन कुमार मिश्रा, डा मुस्तफा नाज को उनकी हिंदी सेवाओं के लिए हिंदी रत्न सम्मान 2026 से सम्मानित किया, जिसका उपस्थित श्रोताओं ने करतल ध्वनि से अनुमोदन किया। संगोष्ठी में अतिथियों का भव्य स्वागत प्राचार्य डा महेंद्र नाथ पाण्डेय एवं डा केतन कुमार मिश्रा ने, कुशल संचालन डा दीपक कुमार एवं डा सूरज कुमार तिवारी ने संगोष्ठी का प्रतिवेदन डा राकेश कुमार ने और धन्यवाद ज्ञापन डा मृत्युंजय कुमार सिंह एवं डा मुस्तफा नाज ने किया। समापन सत्र में प्राचार्य ने आगत अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि प्रो पांडेय जी ने रांची विश्वविद्यालय में लगभग चालीस वर्षों तक अध्ययन- अध्यापन का कार्य किया है।आपके पास एक लंबा अनुभव है तथा आपका उद्बोधन हमारे विद्यार्थियों हेतु पाथेय होगा जो भविष्य के जीवन हेतु प्रेरणा एवं दिशा निर्देश प्रदान करेगा। उन्होंने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। अंत में राष्ट्रगान और शांति पाठ से कार्यक्रम की पूर्णाहुति हुई।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।