टाटा समूह का झारखंड में 11 हजार करोड़ का नया निवेश, सीएम हेमंत और टाटा सन्स के चेयरमैन के बीच वार्ता में कई परियोजनाओं पर सहमति

Vinita Choubey
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रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ सोमवार को रांची में टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और समूह के शीर्ष अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में राज्य में टाटा समूह की नई निवेश योजनाओं, औद्योगिक विस्तार और झारखंड के समग्र विकास में साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखरन ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात सकारात्मक और सार्थक रही। उन्होंने कहा कि टाटा समूह की जड़ें झारखंड से जुड़ी हैं और यहीं से कंपनी ने वैश्विक स्तर तक अपनी पहचान बनाई। राज्य के साथ दीर्घकालिक और बहुआयामी साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में कई योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ है।

उन्होंने बताया कि टाटा स्टील जमशेदपुर में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का नया निवेश करने जा रही है। यह निवेश उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित स्टील उत्पादन पर केंद्रित होगा, जिससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक दक्ष बनेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निवेश बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजार को भी ध्यान में रखकर योजना बनाई गई है। इसी तरह टाटा मोटर्स भी जमशेदपुर इकाई में हाइड्रोजन ट्रकों के क्षेत्र में निवेश कर रही है। चंद्रशेखरन ने कहा कि नई तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन भविष्य की जरूरत है और इस दिशा में झारखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समूह रांची सहित राज्य के अन्य शहरों में होटल परियोजनाओं पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, कौशल विकास, नई तकनीक और ज्ञान-आधारित उद्योगों में साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत राज्य में पहले से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं और इन्हें आगे और विस्तारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि टाटा समूह का झारखंड से ऐतिहासिक संबंध रहा है और यहीं से इसकी औद्योगिक यात्रा की शुरुआत हुई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य और टाटा समूह के बीच सहयोग आगे और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने ज्ञान-आधारित उद्योगों में निवेश की संभावनाओं पर भी जोर दिया। दोनों पक्षों ने राज्य के विकास के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों का एक विशेष समूह गठित करने पर सहमति जताई, जो संभावित परियोजनाओं और निवेश के क्षेत्रों की पहचान कर ठोस कार्ययोजना तैयार करेगा।

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