194th Martyrdom Day Observed With Reverence : रांची में अमर शहीद वीर बुधु भगत (Immortal Martyr Veer Budhu Bhagat) का 194वां शहादत दिवस पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम का आयोजन अमर शहीद वीर बुधु भगत हूटी मोर्चा के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए।

लोगों ने एकजुट होकर वीर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके संघर्ष को याद किया।
बड़ी संख्या में जुटे समाज के लोग
इस मौके पर मोर्चा के अध्यक्ष प्रदीप तिर्की ने कहा कि इतिहास में 1857 की क्रांति को पहली आजादी की लड़ाई माना जाता है, जबकि उससे पहले 1831-32 में छोटानागपुर क्षेत्र में कोल विद्रोह के रूप में अंग्रेजों, जमींदारों और साहूकारों के खिलाफ आंदोलन (Agitation) शुरू हो चुका था। यह आंदोलन वीर बुधु भगत के नेतृत्व में हुआ था।
कोल विद्रोह को बताया पहली बड़ी लड़ाई
वक्ताओं ने बताया कि बुधु भगत छापामार युद्ध कला में निपुण थे। 13 फरवरी 1832 को British सेना के साथ भीषण संघर्ष में वे अपने दो बेटों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए।
उनके बलिदान के बाद अंग्रेजी शासन को छोटानागपुर क्षेत्र में प्रशासनिक बदलाव करने पड़े और 1833 में इस इलाके को नॉन-रेगुलेशन प्रांत घोषित किया गया।

बलिदान के बाद बदली प्रशासनिक व्यवस्था
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि वीर बुधु भगत के योगदान को इतिहास में प्रमुखता से दर्ज किया जाए और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिया जाए।
इस अवसर पर उनके वंशज शिवपूजन भगत सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों महिला-पुरुष उपस्थित रहे।




