झारखंड में पानी की कमी नहीं, फिर भी किसानों को नहीं मिल रही सिंचाई की सुविधा: राज्यपाल

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रांची: राज्यपाल रमेश बैस ने मंगलवार को राजभवन में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव शैलेश कुमार सिंह, सचिव कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग अबु बकर सिद्दीकि सहित विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य के किसानों को हर हाल में उन्नत बीज मिले, यह सुनिश्चित हों। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था मुख्य आधार है। ऐसे में किसानों के हित का सदैव ध्यान रखें।

उन्होंने राज्य के किसानों के खेतों की मिट्टी की जाँच (सॉइल टेस्टिंग) में तेजी लाने का निर्देश दिया ताकि किसानों को उनके खेत की मिट्टी में कमियाँ अथवा विशिष्टता की जानकारी प्राप्त हो सके और किसान अनुकूल खाद का उपयोग कर सकें।

राज्यपाल ने कहा कि यहाँ की मिट्टी एवं जलवायु सब्जी उत्पादन के लिए अनुकूल है। हमें किसानों को इस दिशा में और प्रेरित करने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड में पानी की कमी नहीं है, फिर भी किसानों को कृषि कार्य के लिए प्रर्याप्त सिंचाई की सुविधा सुलभ नहीं हो पा रही है, यह एक गंभीर समस्या है। इस दिशा में समनव्य के साथ सक्रियता के साथ कार्य करने की जरूरत है।

सरकारी स्तर पर जल संचयन को और प्रोत्साहित करना होगा। उनहोंने कॉपरेटिव बैंक को पूर्णतः सक्रियता से कार्य करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में सहकारी व्यवस्था में सुधार लाना नितांत आवश्यक है।

राज्यपाल ने बैठक में तथ्यों की जानकारी लेते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा सफलतापूर्वक कई योजनाओं का क्रियान्वन की जानकारी दी। झारखंड राज्य भी उनको सफलतापूर्वक अपना सकता है।

कृषि पैदावार और मार्केटिंग को अच्छा और आसानी से सुलभ बनाया जा सकता है। राज्यपाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों से छत्तीसगढ़ जाकर वहाँ की योजनाओं की जानकारी लेने को कहा जिससे राज्य के किसान लाभान्वित हो सके।

राज्यपाल ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के खेत में जाकर उनसे संवाद स्थापित करें। इससे वे किसानों की समस्याओं को बेहतर तरीके से अवगत होने के साथ किसानों के मनोबल में भी वृद्धि ला सकेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि बागवानी की दिशा में गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की आवश्यकता है। आर्किड के क्षेत्र में अपार संभावनायें हैं।

इस दिशा में भी ध्यान दिया जाय। उन्होंने कहा कि खेतों मेड़ में गेंदा आदि के फूल लगाने के लिए प्रेरित करें। इन सबसे किसानों की आय में वृद्धि लाई जा सकती है।

उन्होंने राज्य में कौन-कौन से फल के क्षेत्र में संभावनाएं हैं, इस पर शोध कर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने अधिक-से-अधिक ग्राफ्टिंग करने के लिए भी निर्देश दिया।

बैठक में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों द्वारा विभाग के विभिन्न कार्यों एवं उपलब्धियों से अवगत कराते हुए कहा कि राज्य ने विगत कुछ वर्षों में मत्स्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

राज्य में मत्स्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ पड़ोसी राज्यों को निर्यात भी करता है। झारखण्ड राज्य को दलहन के क्षेत्र में कई बार कृषि कर्मण पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।

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