
भारत में थायराइड से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं और इनमें लगभग 80 प्रतिशत मरीज महिलाएं हैं। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें थायराइड की समस्या है। समय पर जांच और उपचार न मिलने पर यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों और सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती है।
क्या है थायराइड और इसका काम?
थायराइड एक छोटी तितली के आकार की एंडोक्राइन ग्रंथि है, जो गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित होती है। यह थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) जैसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, हृदय गति, शरीर के तापमान और कई अन्य जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। थायराइड ग्रंथि का नियंत्रण पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा बनने वाले TSH (Thyroid Stimulating Hormone) के माध्यम से होता है।
थायराइड के प्रमुख प्रकार
थायराइड की समस्या मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है। हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिससे शरीर की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। हाइपरथायराइडिज्म में हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगते हैं, जिससे शरीर की क्रियाएं सामान्य से अधिक तेज हो जाती हैं। तीसरी स्थिति घेंघा (Goiter) है, जिसमें थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है और गले में सूजन या गांठ दिखाई देने लगती है।
हाइपोथायराइडिज्म के लक्षण और कारण
हाइपोथायराइडिज्म के मरीजों में हमेशा थकान महसूस होना, बिना कारण वजन बढ़ना, कब्ज, ठंड अधिक लगना, त्वचा और बालों का रूखा होना, अवसाद, एकाग्रता में कमी तथा महिलाओं में मासिक धर्म का अधिक होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके प्रमुख कारणों में आयोडीन की कमी, ऑटोइम्यून रोग (जैसे हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस), थायराइड सर्जरी, रेडियोआयोडीन थेरेपी या कुछ दवाओं का प्रभाव शामिल हो सकता है।
हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण और कारण
हाइपरथायराइडिज्म में मरीज को घबराहट, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना, अत्यधिक पसीना आना, हाथ कांपना, वजन कम होना, नींद न आना और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके प्रमुख कारणों में ग्रेव्स डिजीज, टॉक्सिक मल्टीनोड्यूलर गोइटर, टॉक्सिक एडेनोमा और आवश्यकता से अधिक थायराइड हार्मोन की दवाओं का सेवन शामिल हो सकता है।
घेंघा और थायराइड कैंसर के संकेत
जब थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है तो उसे घेंघा (Goiter) कहा जाता है। इसमें गले के सामने सूजन या गांठ दिखाई दे सकती है। यदि यह अधिक बढ़ जाए तो सांस लेने, खाना निगलने या आवाज में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय से मौजूद घेंघा थायराइड कैंसर से भी जुड़ा हो सकता है। अचानक गांठ का तेजी से बढ़ना, गले में दर्द, खून के साथ खांसी, आवाज बैठना या गर्दन में नई गांठ महसूस होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
इलाज और बचाव के उपाय
थायराइड का इलाज उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। हाइपोथायराइडिज्म में मरीज को थायराइड हार्मोन की दवा (थायरोक्सिन) दी जाती है। हाइपरथायराइडिज्म का उपचार दवाओं, रेडियोआयोडीन थेरेपी या जरूरत पड़ने पर सर्जरी से किया जाता है। वहीं बड़े घेंघा या कैंसर की आशंका होने पर ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन युक्त नमक का नियमित सेवन, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, समय-समय पर थायराइड जांच और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना इस बीमारी से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं। खासकर महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और परिवार में थायराइड का इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश थायराइड रोगों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

