अनेकता में एकता की भावना को विकसित करता है तुलनात्मक साहित्य : डॉ जंग बहादुर पांडेय

गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय, संबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विद्वानों ने तुलनात्मक साहित्य की भूमिका पर चर्चा की और इसे वैश्विक समझ, सांस्कृतिक संवाद तथा अनेकता में एकता का सेतु बताया।

Neeral Prakash
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संबलपुर : गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय, संबलपुर के हिंदी विभाग के तत्वावधान में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान एवं उच्च शिक्षा विभाग ओडिशा की ओर से प्रायोजित ‘तुलनात्मक साहित्य : दशा और दिशा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को हुआ।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए रांची विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य ज्ञान की वह शाखा है, जिसमें दो या अधिक भिन्न भाषायी, राष्ट्रीय या सांस्कृतिक समूहों के साहित्य का अध्ययन किया जाता है। तुलना इस अध्ययन का प्रमुख अंग है। साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन व्यापक दृष्टि प्रदान करता है, संकीर्णता के विरोध में व्यापकता आज के विश्व मानव की आवश्यकता है। तुलनात्मक साहित्य सांस्कृतिक समझ और अनेकता में एकता की भावना को विकसित करता है।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ब्रह्मपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ आदित्य प्रसाद पाढी ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य दो या अधिक भाषाओं, संस्कृतियों या विषयों का तुलनात्मक अध्ययन है, जो सांस्कृतिक एकता को समझने, अनुवाद के माध्यम से वैचारिक आदान-प्रदान बढ़ाने और साहित्य के वैश्विक परिप्रेक्ष्य को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के विद्वान् कुलपति डॉ सुशांत कुमार दास ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय का यह सौभाग्य है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी हमारे विश्वविद्यालय में आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि तुलनात्मक साहित्य राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर साहित्यिक कृतियों की समानता, भिन्नता और प्रभाव को विश्लेषित करता है।इस अवसर पर उडीसा खुला विश्वविद्यालय संबलपुर के परीक्षा नियंत्रक डॉ उमापति चरण एवं संबलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ मुरारी लाल शर्मा ने भी अपने सारगर्भित उद्बोधन से संगोष्ठी में चार चांद लगाया।

डॉ जेबी पांडेय ने सुंदर संगोष्ठी के आयोजन के लिए कुलपति डॉ सुशांत कुमार दास को सुंदर कांड की प्रति देकर सम्मानित किया। आगत अतिथियों का भव्य स्वागत संगोष्ठी के संयोजक डॉ रंजन कुमार सेठी ने, संचालन डॉ दाशरथी बेहरा ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रणति बेहरा ने किया। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ जयंत कर शर्मा ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है।अनुवाद के माध्यम से तुलनात्मक साहित्य विचारों के आदान प्रदान को बढ़ावा देता है, जिससे एक दूसरे के साहित्यिक परिदृश्य को समझने में सहायता मिलती है।

इस सत्र विषय विशेषज्ञ के रूप में बोलते हुए में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेवा निवृत प्रो डॉ प्रकाश चंद्र पटनायक ने तुलनात्मक साहित्य पर गहन प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्वीकरण के युग में तुलनात्मक साहित्य का महत्व असंदिग्ध हो गया है। डॉ चक्रधर प्रधान ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य हमें वैश्विक चेतना प्रदान करता है।इस सत्र में डॉ रश्मि रेखा जेना, डॉ सोनम ने भी अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डॉ दाशरथी बेहरा ने, संचालन डॉ स्मृति स्मरणिका जेना और धन्यवाद ज्ञापन स्नेहा साहू ने किया।

भोजनावकाश के बाद दूसरा तकनीकी सत्र शुरू हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ चक्रधर प्रधान ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कोलकाता से आए हुए प्रो अरुण होता ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य दृष्टि को व्यापक बनाता है। अंग्रेजी में सर्वप्रथम तुलनात्मक साहित्य शब्द का प्रयोग मैथ्यू आर्नाल्ड ने एम्पियर के शब्दों इस्तवार कोंपारातीव का अनुवाद करते हुए 1848 में किया था। फ्रांसीसी में इस शब्द का प्रयोग सादृश्य के लिए किया जाता है। अर्थात् भिन्न भिन्न साहित्य में इसका प्रयोग विभिन्न रूपों में हुआ है।1907 में विश्व साहित्य शीर्षक निबंध में विश्व कवि रवीन्द्र नाथ टैगोर ने तुलनात्मक साहित्य के महत्व को प्रतिपादित किया।तुलनात्मक साहित्य आज की आवश्यकता है। डॉ सत्य प्रकाश तिवारी ने नागार्जुन और नेपाली कवि युद्ध प्रसाद मिश्र की रचनाओं की तुलनात्मक व्याख्या की। इस सत्र में सूरज प्रधान एवं भारती रविदास ने भी अपना पर्चा पढ़ा। सत्र का संचालन गोविन्द नायक और धन्यवाद ज्ञापन निरूपमा साहू ने किया। आरंभ कुलगीत से और समापन राष्ट्र गीत से हुआ।

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नीरल प्रकाश के पास पत्रकारिता में 2 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में काम किया है। पिछले 2 सालों से वे IDTV इंद्रधनुष के साथ काम कर रही हैं, जहां उन्होंने ऑन-एयर प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ बैकएंड कंटेंट क्रिएशन में भी योगदान दिया। समाचार रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने आकर्षक स्क्रिप्ट तैयार करने और कहानी को पेश करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।