बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही टापू बन जाता है उदालखाड़ गांव

पुल नहीं होने से बरसात में उदालखाड़ गांव का संपर्क कट जाता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को कंधे पर उठाकर नदी पार कराने की मजबूरी।

Razi Ahmad
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  • पुल के अभाव में हर साल कट जाता है संपर्क, बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों के इलाज तक पर पड़ता है असर

महुआडांड़: लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड की परहाटोली पंचायत स्थित उदालखाड़ गांव में बरसात का मौसम ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क मुख्य सड़क और आसपास के क्षेत्रों से कट जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी में पानी बढ़ने के बाद उदालखाड़ गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो जाता है। यह समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

नदी पार कर पहुंचते हैं ग्रामीण

उदालखाड़ गांव महुआडांड़ प्रखंड मुख्यालय से करीब नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुख्य सड़क से गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को नदी पार करनी पड़ती है। सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बरसात में नदी का पानी बढ़ते ही रास्ता बेहद जोखिम भरा हो जाता है।

तेज बारिश के दौरान नदी में पानी का बहाव इतना बढ़ जाता है कि ग्रामीणों के लिए इसे पार करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गांव का सीधा संपर्क मुख्य सड़क से टूट जाता है और ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय रिपोर्टों में भी गांव के बरसात में टापू बनने और पुल के अभाव की समस्या सामने आ चुकी है।

बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ता है असर

नदी पर पुल नहीं होने का सबसे बड़ा असर गांव के स्कूली बच्चों पर पड़ता है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। गांव में विद्यालय की सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को बाहर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। नदी उफान पर होने के दौरान अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी डरते हैं।

इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनकी नियमित उपस्थिति पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी बच्चों को हर बरसात में जोखिम उठाना पड़ता है।

मरीजों को कंधे पर उठाकर ले जाने की मजबूरी

गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर समस्या और गंभीर हो जाती है। बरसात में एंबुलेंस या अन्य वाहन के गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है। गंभीर मरीजों को ग्रामीणों द्वारा कंधे पर उठाकर नदी पार कर मुख्य सड़क तक ले जाने की स्थिति सामने आती रही है। इसके बाद ही वाहन के माध्यम से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में कुछ मिनट भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन पुल के अभाव में मरीज को अस्पताल पहुंचाने में अनावश्यक देरी हो जाती है।

सड़क, बिजली और पानी की समस्या भी बरकरार

उदालखाड़ गांव में सिर्फ पुल की समस्या ही नहीं है। ग्रामीणों के सामने सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या भी रही है। पूर्व में ग्रामीणों ने बताया था कि गांव में बिजली के पोल तो लगाए गए, लेकिन तार नहीं पहुंचने के कारण बिजली की सुविधा नहीं मिल सकी। वहीं, जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए जलमीनारों के खराब रहने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।

पेयजल के लिए ग्रामीणों के नदी अथवा चुआं पर निर्भर रहने की समस्या भी सामने आई है। बरसात में जब नदी का पानी बढ़ जाता है, तब आवागमन के साथ-साथ सुरक्षित पेयजल की चिंता भी बढ़ जाती है।

वर्षों से आश्वासन, अब स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि गांव की समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई। आवेदन भी दिए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहते हैं।

ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है कि नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए और गांव तक सड़क का निर्माण/सुदृढ़ीकरण किया जाए, ताकि बरसात में गांव का संपर्क न टूटे। पुल बनने से बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, किसानों को बाजार तक जाने और ग्रामीणों के दैनिक आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।

हर बरसात में एक ही सवाल—कब बनेगा पुल?

उदालखाड़ की समस्या केवल एक गांव की परेशानी नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीण संपर्क व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल है। आजादी के दशकों बाद भी यदि बारिश के कुछ दिनों में पूरा गांव मुख्यधारा से कट जाए और ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़े, तो यह व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।