US eyes oil purchase from Russia : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत और रूस के बीच तेल आयात को लेकर एक अहम बयान दिया है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि मोदी एक अच्छे व्यक्ति हैं और भारत यह अच्छी तरह समझता था कि अगर रूस से तेल खरीद जारी रही, तो अमेरिका की ओर से टैरिफ जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.
Trump के इस बयान के बाद भारत की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.
भारत का रूसी तेल आयात घटा
इस बयान का सीधा संबंध भारत द्वारा रूस से तेल आयात में आई हालिया कमी से जोड़ा जा रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो दिसंबर में घटकर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया.
इस आंकड़े के सामने आने के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या भारत ने यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया है.
अमेरिकी सीनेटर का दावा
इस बीच America के सीनेटर लिंडसे ग्राहम के एक बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया. ANI के मुताबिक, ग्राहम ने कहा कि पिछले महीने भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उनसे मुलाकात कर बताया था कि भारत अब रूस से कम तेल खरीद रहा है और इसी आधार पर भारत पर लगाए गए टैरिफ को आधा करने की मांग की थी.
ट्रंप की खुली टिप्पणी
ट्रंप ने एक सार्वजनिक सभा में कहा कि असल में मोदी उन्हें खुश करना चाहते थे.
उन्होंने कहा कि मोदी जानते थे कि अमेरिका नाराज है और अगर भारत ने उनकी बात नहीं मानी, तो टैरिफ बहुत जल्दी बढ़ाए जा सकते हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी अच्छे इंसान हैं और हालात को समझते हैं.
कांग्रेस का हमला
इन बयानों के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला. कांग्रेस ने ट्रंप के बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कहा कि ट्रंप के अनुसार भारत ने रूस से तेल खरीदना इसलिए कम किया क्योंकि अमेरिका ने टैरिफ का दबाव बनाया.
पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिका के इशारों पर चल रही है.
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि अगर ट्रंप कभी युद्धविराम की बात करते हैं और कभी रूस से तेल खरीद पर रोक लगाने की धमकी देते हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) इस पर चुप क्यों हैं.
पार्टी का कहना है कि मोदी की इस चुप्पी और कमजोरी का खामियाजा देश को क्यों भुगतना पड़ रहा है.




