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वायग्रा केवल प्राइवेट पार्ट ही नहीं, ब्रेन की नसें भी खोल सकती है! रिसर्च में खुलासा

सिल्डेनाफिल, जिसे आमतौर पर वियाग्रा के नाम से जाना जाता है, का नाम सुनते ही लोग इसे फिजिकल इंटीमेसी से जोड़कर देखने लगते हैं। हालांकि, हालिया रिपोर्टों में इसे लेकर कुछ नई और चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

Viagra and Brain Health:  सिल्डेनाफिल, जिसे आमतौर पर वियाग्रा के नाम से जाना जाता है, का नाम सुनते ही लोग इसे फिजिकल इंटीमेसी से जोड़कर देखने लगते हैं। हालांकि, हालिया रिपोर्टों में इसे लेकर कुछ नई और चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि यह दवा उन व्यक्तियों के ब्रेन में ब्लड फ्लो को बढ़ाती है और रक्त वाहिकाओं के कार्य को सुधारती है, जिनमें मेमोरी से जुड़ी परेशानियों का खतरा अधिक होता है।

बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो सकती है वियाग्रा

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि वियाग्रा से बुजुर्गों के दिमाग में ब्लड फ्लो को बढ़ाया जा सकता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दिमाग तक पहुंचने वाली आर्टरी या धमनियां पतली हो जाती हैं, जिसके चलते भूलने की बीमारी यानी वैस्कुलर डिमेंशिया की समस्या होने लगती है। वैस्कुलर डिमेंशिया, डिमेंशिया का ही एक प्रकार है, जो व्यक्ति के सोच, स्मृति और व्यवहार को प्रभावित करता है।

रिसर्च में चौंकाने वाले नतीजे

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि वियाग्रा ब्रेन की छोटी रक्त वाहिकाओं को खोलने की क्षमता रखती है, जिससे ब्लड फ्लो में सुधार होता है और स्मृति हानि में कमी आती है। एक रिसर्च में, वियाग्रा का प्रयोग कुछ लोगों पर किया गया और उन्हें यह दवा दी गई। वियाग्रा लेने से एक हफ्ते पहले और एक हफ्ते बाद में उनका एमआरआई किया गया।

दूसरी ओर, कुछ लोगों को मन बहलाने वाली दवा प्लेसिबो दी गई। एमआरआई से पता नहीं चल पाया कि वियाग्रा की सिंगल डोज लेने के बाद लोगों के दिमाग में ब्लड फ्लो तेज हुआ या नहीं, लेकिन जब यही प्रयोग 70 साल के ऊपर वाले लोगों पर किया गया तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। नतीजों में देखा गया कि उनके दिमाग के ग्रे मैटर में ब्लड फ्लो तेजी से बढ़ा हुआ था।

कोशिकाओं में सूजन का जोखिम कम

इससे पहले ‘नेचर एजिंग’ जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में भी कुछ बातें सामने आई थीं। इंश्योरेंस डाटा के आधार पर देखा गया कि जिन्होंने वियाग्रा ली थी, उनमें डिमेंशिया होने की आशंका 69 प्रतिशत तक कम थी। ‘जर्नल ऑफ अल्जाइमर डिजीज’ की मानें तो सिल्डेनाफिल के इस्तेमाल से दिमाग के नर्व टिशू की ग्रोथ बेहतर होती है और कोशिकाओं में सूजन का जोखिम भी कम हो जाता है। ये दोनों ही चीजें डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का जोखिम बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

इस प्रकार, वियाग्रा न केवल फिजिकल इंटीमेसी के लिए उपयोगी है, बल्कि यह ब्रेन की सेहत को भी सुधार सकती है, खासकर बुजुर्गों में मेमोरी लॉस और डिमेंशिया जैसी समस्याओं के खतरे को कम करने में सहायक हो सकती है।

 

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