
रांची : राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए उनके डिजाइन और संरचना में व्यापक सुधार का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को सहज, त्वरित और वैज्ञानिक तरीके से इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
हालिया निरीक्षण में यह सामने आया कि कई मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में आईसीयू, सीसीयू, एचडीयू, ऑपरेशन थिएटर, आईपीडी, रेडियोलॉजी और डायग्नोस्टिक केंद्रों की व्यवस्था वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं है। इससे मरीजों की आवाजाही और उपचार प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसमें रिम्स, रांची के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ-साथ सदर अस्पताल के प्रतिनिधि और झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के अधिकारी शामिल हैं।
‘पेशेंट फ्लो’ और ‘वर्क फ्लो’ पर आधारित होगा निर्माण
नई व्यवस्था के तहत मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों का निर्माण “पेशेंट फ्लो” और “वर्क फ्लो” के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर किया जाएगा। इसके अंतर्गत आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी और रेडियोलॉजी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को एक ही फ्लोर या नजदीकी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, ताकि इलाज में समय की बचत हो सके।
ट्रॉमा सेंटर को ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थापित किया जाएगा, जिससे एंबुलेंस को तुरंत पहुंच मिल सके। संक्रमण नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह स्टेराइल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा और साफ व गंदे क्षेत्रों का स्पष्ट विभाजन किया जाएगा।
इसके अलावा मरीजों, अस्पताल कर्मियों और बायो-मेडिकल वेस्ट के आवागमन के लिए अलग-अलग लिफ्ट और कॉरिडोर अनिवार्य किए जाएंगे। रेडियोलॉजी, लैब और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं को इस तरह स्थापित किया जाएगा कि ओपीडी और इमरजेंसी दोनों के मरीज आसानी से इन तक पहुंच सकें।
विशेषज्ञ समिति की मंजूरी के बाद ही होगा अंतिम निर्माण
नई गाइडलाइन के अनुसार निर्माण एजेंसियों को अपने प्रस्तावित डिजाइन विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। समिति की समीक्षा और सुझावों के बाद ही भवनों के अंतिम नक्शे को मंजूरी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द ही सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

