वाराणसी में बनाएंगे रणनीति और आजमगढ़ में घेरेंगे अखिलेश यादव को : अमित शाह

News Aroma
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नई दिल्ली: भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2017 की जीत को दोहराने के लिए एक बार फिर से मिशन यूपी पर जा रहे हैं।

शुक्रवार को 2 दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुंचने वाले अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पार्टी के लगभग 700 नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी जीत का मंत्र देंगे तो वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गढ़ आजमगढ़ में रैली कर सपा सुप्रीमो को घेरते भी दिखाई देंगे।

दरअसल , नवंबर में उत्तर प्रदेश में अमित शाह के 2 महत्वपूर्ण दौरे होने जा रहे हैं, जिसमें से एक की शुरूआत शुक्रवार 12 नवंबर को होने जा रही है। 12 नवंबर को अमित शाह पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चुनावी रणनीति को लेकर एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं।

इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , दोनों उपमुख्यमंत्री , सभी चुनाव और चुनाव सह प्रभारी, प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष , प्रदेश संगठन महासचिव , सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष, सभी जिलाध्यक्ष और प्रदेश की सभी 403 विधान सभा सीटों के प्रभारियों समेत लगभग 700 नेता शामिल होंगे।

पार्टी की चुनावी तैयारियों के लिहाज से इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सदस्यता अभियान समेत पार्टी की सभी चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने के साथ-साथ भविष्य की रणनीति भी तय की जाएगी। शाह वाराणसी में ही रात्रि विश्राम करेंगे।

दौरे के दूसरे और अंतिम दिन अमित शाह धुंआधार तरीके से प्रदेश के कई जिलों का दौरा करेंगे और चुनावी रैली को संबोधित भी करेंगे।

13 नवंबर को अमित शाह वाराणसी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे और इसके बाद अखिलेश यादव के गढ़ आजमगढ़ के लिए रवाना हो जाएंगे। अखिलेश के गढ़ में शाह, राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने के बाद एक रैली को भी संबोधित करेंगे।

शनिवार को ही अमित शाह वाराणसी और आजमगढ़ के बाद बस्ती पहुंचकर स्थानीय सांसद हरीश द्विवेदी द्वारा आयोजित सांसद खेल महाकुंभ का शुभारंभ करेंगे और साथ ही एक रैली को भी संबोधित करेंगे।

एक के बाद एक धुंआधार रैली और कार्यक्रम करने के बाद अमित शाह सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर एयरपोर्ट से होते हुए वापस आ जाएंगे।

अमित शाह को उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चुनावी रणनीतिकार माना जाता है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा को अपना दल के साथ मिलकर राज्य की 80 में से 73 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी, उस समय अमित शाह बतौर राष्ट्रीय महासचिव, उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे।

2017 के विधान सभा चुनाव और 2019 के लोक सभा चुनाव के समय राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह ने अपनी रणनीति का लोहा मनवाया था।

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