नक्सल मामलों में आई गिरावट, 2025 में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था का असर

Archana Ekka
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Decline in Naxal Cases : झारखंड में नक्सल गतिविधियों को लेकर साल 2025 में राहत भरी तस्वीर सामने आई है। साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में नक्सल मामलों (Naxal Cases) से जुड़े दर्ज केसों की संख्या में 5.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

यह बदलाव राज्य में चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों और सख्त रणनीति का नतीजा माना जा रहा है।

साल की शुरुआत में ज्यादा, अंत तक कम हुए मामले

साल 2025 की शुरुआत जनवरी महीने में नक्सल मामलों की संख्या 28 रही थी, जो अपेक्षाकृत अधिक थी। इसके बाद धीरे-धीरे इन घटनाओं में कमी आती गई।

साल के अंत तक, नवंबर महीने में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 8 मामलों तक पहुंच गया। पूरे साल में Naxal से जुड़े कुल 190 मामले दर्ज किए गए।

2024 में ज्यादा सक्रिय थे नक्सली

अगर साल 2024 की बात करें तो उस वर्ष नक्सल गतिविधियां ज्यादा देखी गई थीं। जून 2024 में सबसे अधिक 29 मामले सामने आए थे।

पूरे साल औसतन हर महीने 16 से 17 नक्सल मामले दर्ज हो रहे थे। कुल मिलाकर 2024 में नक्सल से जुड़े 201 मामले सामने आए थे, जो 2025 के मुकाबले अधिक हैं।

सुरक्षा बलों की सख्ती का असर

राज्य में नक्सलवाद (Racism) के खिलाफ सुरक्षा बलों की जीरो टॉलरेंस नीति का असर साफ दिखाई दे रहा है।

पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त कार्रवाई से न सिर्फ घटनाओं में कमी आई है, बल्कि नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र भी सिमटता जा रहा है। कई इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन और कैंप स्थापित किए गए हैं।

एक साल में 45 नक्सली ढेर

बीते एक साल में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। Jharkhand Police और CRPF की संयुक्त कार्रवाई में 45 नक्सली मारे गए हैं।

इनमें से 24 नक्सलियों पर कुल 7.64 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। ये मुठभेड़ लातेहार, चाईबासा, बोकारो, हजारीबाग, पलामू और गुमला जैसे जिलों में हुईं।

नक्सल प्रभावित जिलों पर खास नजर

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम, गिरिडीह, गुमला, लातेहार और लोहरदगा झारखंड के प्रमुख नक्सल प्रभावित जिले हैं।

इनमें से गिरिडीह, गुमला, लातेहार और लोहरदगा को ‘District of Concern’ की सूची में रखा गया है, जहां सुरक्षा बलों की विशेष निगरानी और कार्रवाई जारी है।

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में नक्सलवाद पर काबू पाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।