विश्वविद्यालय शिक्षकों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की

Archana Ekka
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Big relief for University Teachers : रांची से एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है, जो राज्य के विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।

शिक्षकों की प्रोन्नति और उससे जुड़े वित्तीय लाभ के मामले में Jharkhand High Court की डबल बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सिंगल बेंच के पहले दिए गए आदेश को सही ठहराया है।

डबल बेंच का स्पष्ट फैसला

High Court की डबल बेंच, जिसमें एमएस सोनक और राजेश शंकर शामिल थे, ने राज्य सरकार की ओर से दायर LPA (अपील) को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच का आदेश कानून के अनुसार है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

सिंगल बेंच का क्या था आदेश

इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच, जिसकी अध्यक्षता दीपक रोशन कर रहे थे, ने एक अहम आदेश दिया था। सिंगल बेंच ने झारखंड सरकार द्वारा बनाए गए परिनियम के क्लॉज-3 की शर्त को कानून सम्मत नहीं मानते हुए खारिज कर दिया था।

साथ ही यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय शिक्षकों को प्रोन्नति या अन्य वित्तीय लाभ नियत तिथि से ही दिए जाएं, जिस दिन से वे इसके हकदार होते हैं।

मामला किस नियम से जुड़ा है

यह पूरा मामला UGC के वर्ष 2010 के रेगुलेशन से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 15 दिसंबर 2022 को एक परिनियम बनाया था, जिसमें विश्वविद्यालय शिक्षकों को 1 दिसंबर 2009 से अगस्त 2021 के बीच देय प्रोन्नति या वित्तीय लाभ को लेकर क्लॉज-3 में एक शर्त जोड़ी गई थी।

इस शर्त के तहत बकाया लाभ को सीमित करने की बात कही गई थी।

शिक्षकों की ओर से उठाई गई आपत्ति

इस परिनियम के खिलाफ शिक्षकों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार की ओर से नियम बनाने में हुई देरी का नुकसान शिक्षकों को नहीं उठाना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि यूजीसी रेगुलेशन 2010 के तहत जो लाभ बनते हैं, उन्हें तय समय से मिलना चाहिए।

क्लॉज-3 क्यों बना विवाद का कारण

सरकार के Statutes के क्लॉज-3 में यह प्रावधान था कि शिक्षकों को प्रोन्नति या उससे जुड़े वित्तीय लाभ 15 दिसंबर 2022 से देय होंगे। इसी शर्त को सिंगल बेंच ने रद्द कर दिया था।

इसके बाद राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के आदेश को डबल बेंच में चुनौती दी, लेकिन वहां भी सरकार को राहत नहीं मिली।

शिक्षकों के लिए क्या है इसका मतलब

हाईकोर्ट के इस फैसले से अब यह साफ हो गया है कि विश्वविद्यालय शिक्षकों को उनके प्रोन्नति और उससे जुड़े वित्तीय लाभ उसी तिथि से मिलेंगे, जिस तिथि से वे इसके पात्र बने थे।

कुल मिलाकर यह निर्णय राज्य के शिक्षकों के हित में माना जा रहा है और इससे लंबे समय से चल रहा विवाद खत्म होने की उम्मीद है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।