
Jharkhand High Court : झारखंड हाई कोर्ट ने एक महिला को कथित तौर पर मानसिक अस्पताल में अवैध तरीके से भर्ती (Illegal Admission) किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है।
अदालत की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद शामिल हैं, ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में महिला और उसकी मां को अदालत के सामने पेश किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को तय की गई है।
शादी से पहले विवाद, अस्पताल में भर्ती का आरोप
इस मामले में याचिकाकर्ता रंजीत सिंह ने Habeas Corpus याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी मंगेतर, जिनकी उम्र लगभग 41 वर्ष है, को उनके परिवार ने संपत्ति विवाद के कारण मानसिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद रांची के मानसिक अस्पताल में भर्ती करा दिया।
याचिका के अनुसार दोनों की मुलाकात वर्ष 2023 में एक मैट्रिमोनियल साइट के माध्यम से हुई थी और परिवार की सहमति से रोका और शगुन की रस्में भी पूरी हो चुकी थीं। इसके बाद शादी अक्टूबर 2024 में होने वाली थी।
संपत्ति को लेकर बढ़ा विवाद
याचिका में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2024 में महिला के भाई ऑस्ट्रेलिया से लौटे और विवाह के लिए पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी छोड़ने का दबाव बनाने लगे। जब महिला ने ऐसा करने से मना किया, तो कथित रूप से उसे धमकियां दी गईं।
इसके बाद 27 अगस्त 2024 को दोनों को कदम थाना बुलाया गया, जहां महिला की मां ने कुछ आरोप लगाए। कुछ दिनों बाद महिला अचानक गायब हो गई और उसका मोबाइल भी बंद हो गया।
मां का दावा, बेटी मानसिक रूप से बीमार
दूसरी ओर महिला की मां ने कदम थाना में एफआईआर दर्ज कराते हुए दावा किया कि उनकी बेटी 2011 से मानसिक रूप से अस्वस्थ है। उन्होंने बताया कि पहले उसका इलाज देविस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्री में हुआ और बाद में रिनपास, कांके में भी भर्ती कराया गया था।
अस्पताल और जांच अधिकारी की जानकारी
रिनपास के निदेशक और Medical Superintendent ने अदालत को बताया कि महिला 26 जून 2025 से 16 अक्टूबर 2025 तक अस्पताल में भर्ती थी। बाद में उसकी मां के अनुरोध पर उसे छुट्टी दे दी गई। इसके बाद वह फॉलो-अप इलाज के लिए अस्पताल नहीं आई।
जांच अधिकारी के बयान पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि जांच अधिकारी ने अपने बयान में बदलाव किया है।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और मामले की अलग से जांच की जरूरत बताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच की जाएगी।
