दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदार बना भारत, रूस से नाता घटा

SIPRI रिपोर्ट के अनुसार 2021-2025 के बीच भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा। रूस पर निर्भरता घटी, जबकि फ्रांस, इजरायल और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा।

Vinita Choubey
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नई दिल्ली : भारत एक बार फिर दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों की सूची में दूसरे स्थान पर रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की सोमवार को जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच वैश्विक स्तर पर बिकने वाले कुल हथियारों में भारत की हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत रही है। इस सूची में रूस के साथ युद्ध लड़ रहा यूक्रेन 9.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है। ‘ट्रेंड्स इन इंटरनेशनल आर्म्स ट्रांसफर्स, 2025’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016-2020 की तुलना में 2021-2025 के दौरान भारत के विदेशी हथियारों के आयात में 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

यह गिरावट इस ओर इशारा करती है कि भारत अब अपनी सैन्य जरूरतों के लिए घरेलू स्तर पर हथियारों के डिजाइन और उत्पादन पर अधिक जोर दे रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सचेत किया गया है कि घरेलू उत्पादन में होने वाली देरी की वजह से अब भी भारत को विदेशी सप्लायर्स पर निर्भर रहना पड़ रहा है।रूस के बजाय अब पश्चिम पर भरोसा भारत की रक्षा कूटनीति में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव आया है। सिपरी के आंकड़े बताते हैं कि रूस पर भारत की पारंपरिक निर्भरता तेजी से कम हो रही है। साल 2011-15 में भारत के कुल आयात का 70 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता था, जो 2016-20 में गिरकर 51 प्रतिशत और अब (2021-25) महज 40 प्रतिशत रह गया है।

भारत अब रूस के विकल्प के रूप में फ्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों की ओर देख रहा है। वर्तमान में भारत के कुल हथियार आयात में फ्रांस की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत और इजरायल की 15 प्रतिशत है। हाल ही में फ्रांस को दिए गए 140 लड़ाकू विमानों और जर्मनी के साथ छह पनडुब्बियों के संभावित सौदे इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत द्वारा भारी मात्रा में हथियारों की खरीद का मुख्य कारण चीन और पाकिस्तान के साथ जारी सीमा विवाद है। सैन्य आधुनिकीकरण की इस होड़ में पाकिस्तान भी पीछे नहीं है। वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन गया है। पाकिस्तान के हथियार आयात में पिछले पांच वर्षों के मुकाबले 66 प्रतिशत का भारी उछाल आया है और अब वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 4.2 प्रतिशत है।

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