
चंडीगढ़ : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ने लगा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है और कई राज्यों में गैस आपूर्ति बाधित होने की खबरें हैं।
इस्राइल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 12 दिनों से जारी संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है, जिसमें से लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। आपूर्ति में आ रही बाधाओं के चलते गैस कंपनियों ने ‘फोर्स मेज्योर’ (अप्रत्याशित घटना) लागू कर दिया है, जिसके तहत वे अब समय पर सप्लाई देने की गारंटी देने में असमर्थ हैं। महाराष्ट्र, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में एलपीजी की किल्लत देखी जा रही है। अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या अब पेट्रोल-डीजल के रेट भी बढ़ेंगे। फिलहाल सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
बता दें कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है। यदि युद्ध की स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई और बजट पर पड़ना निश्चित है। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जियों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों को लंबे और महंगे रास्तों से गुजरना पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई और समुद्री बीमा महंगा हो जाएगा।
