
Assam Election 2026 : असम विधानसभा चुनाव के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनसभाओं में आदिवासी समुदाय के अधिकारों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि असम के चाय बागानों को आदिवासियों ने अपने खून-पसीने से खड़ा किया, लेकिन आज भी वही समाज अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित है।
सोरेन ने इसे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय और सम्मान की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, उन्हें आज भी बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाया है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
अपने संबोधन में उन्होंने ‘टी ट्राइब’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे आदिवासी समाज को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने अंग्रेजों के समय का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे आदिवासियों को उनके घरों से दूर लाकर बागानों में काम करने के लिए मजबूर किया गया था, और आजादी के बाद भी उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज को उनकी पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकार पूरी तरह मिलें। “अब चुप रहने का वक्त नहीं है, हमें मिलकर इस ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करना होगा,” उन्होंने कहा।
असम के विश्वनाथ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में सोरेन ने दावा किया कि जनता का उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 9 अप्रैल को मतदान कर जेएमएम प्रत्याशी तिहारो गौर को विजयी बनाएं और अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करें।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने पारंपरिक नारे “जय जोहार” के साथ लोगों का अभिवादन किया और स्थानीय भाषा में समर्थन की अपील भी की। उनके इस दौरे को असम में जेएमएम के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
