
पटना : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के ‘सूचना जनसंपर्क विभाग’ की तरफ से नीतीश कुमार (राज्यसभा सांसद) की तस्वीर के साथ अखबारों में फुल पेज विज्ञापन प्रकाशित किए जाने पर सवाल उठाया है। यह विज्ञापन गुरुवार को प्रकाशित किया गया है। तेजस्वी ने कहा है कि ये वही बिहार है, जो देश का सबसे ग़रीब राज्य है जहां हर व्यक्ति पर औसतन ₹𝟐𝟕,𝟎𝟎𝟎 का कर्ज है। वही बिहार, जहां करीब 𝟓 लाख सरकारी कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। लेकिन ‘सेलेक्टेड सीएम के राज में राजनीति चमकाने के उद्देश्य से लाखों रूपये का विज्ञापन छपावाया गया। यह राज्य वासियों के पैसे का दुरूपयोग भी है। बिहार सरकार किस हैसियत से एक राज्यसभा सांसद की तस्वीर छाप सकती है? क्या पहले ऐसा कभी हुआ? नहीं, तो फिर क्या यह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है?

