समय की गति और बदलते चेहरे!

लालू, मुलायम और शरद की विरासत के बीच केशव, सैनी और सम्राट की राजनीति, क्या बदले दौर में वंचितों को नई दिशा दे पाएंगे या इतिहास खुद को दोहराएगा।

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विवेकानंद सिंह कुशवाहा

वक्त करवट लेता है। जो संघर्षशील बने रहेंगे, उनको उनका हिस्सा भी मिलता है। भले जिस रास्ते से मिले। ऊपर वाली तस्वीर जिस दिन कोलकाता से आयी तो पटना से एक जदयू नेता का फोन आया। उन्होंने कहा कि आपके वॉल पर तस्वीर देखते ही मुझे लालू जी, मुलायम जी और शरद जी की याद आ गयी, इसलिए आपको फोन किया। उस दिन ही उन्होंने कहा था कि अब इनमें से दो तो मुख्यमंत्री हो जायेंगे, केशव प्रसाद जी देखिये कब बन पाते हैं या शरद जी की तरह रह जाते हैं।

दरअसल, बिहार और उत्तर प्रदेश में लालू जी व नेताजी मुलायम सिंह तो मुख्यमंत्री बने, लेकिन शरद जी मध्य प्रदेश से प्रस्थान कर बिहार के जरिये केंद्र की राजनीति करने लगे। अगर शरद जी मध्य प्रदेश की राजनीति में टिक गये होते तो शायद वह भी मुख्यमंत्री बनते। हालांकि, केंद्र की राजनीति में रह कर ही उन्होंने हस्तक्षेप किया। भाजपा ने भी मध्य प्रदेश में ‘मोहन यादव’ को मुख्यमंत्री बना कर वह कर दिखाया, जो शरद जी न कर पाये। जब आप पानी के तेज बहाव को रोकते हैं, तो वह अपनी धारा बदल लेती है। क्योंकि अंततोगत्वा उसे मंजिल तक पहुंचना ही है। केशव प्रसाद मौर्य आरएसएस की स्कूल से थे, विश्व हिंदू परिषद में अशोक सिंघल के साथ काम किया, राम मंदिर आंदोलन में भी शामिल थे, लेकिन गैर आरएसएस बैकग्राउंड वाले भगवाधारी से पिछड़ गये। फिर भी यदि केशव जी केंद्र की राजनीति की तरफ सक्रिय होएं, तो उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

अब सवाल यह है कि अपनी बिरादरी और वंचितों के लिए जो काम लालू जी, मुलायम जी और शरद जी कर गये, क्या नायब सैनी जी, सम्राट जी और केशव जी वह कर पायेंगे? समय के साथ अब वंचितों की जरूरतें बदली हैं। भाजपा के सबका साथ, सबका विकास नीति के तहत ये तीनों वंचित तबके को उंचाइयां दिलाने में अपना कितना योगदान दे पाते हैं, वह तो समय के गर्भ में है, लेकिन भाजपा ने दिखा दिया कि अगर आप सही समय पर कुर्सी स्थानांतरित नहीं करेंगे, तो राजनीति में आपकी धारा से कई धाराएं निकल जायेंगी। उसे स्पेस देने के लिए भाजपा तैयार बैठी है। आप हो सकता है कि कहें कि भाजपा यूज करती है, मैं कहूंगा कि आप भी यूज क्यों नहीं कर लेते!

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।