
नई दिल्ली : पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय के बाद पार्टी अब अपने 94 विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रही है। पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है और विधायकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन विधायकों को 2022 के विधानसभा चुनाव में राघव चड्ढा या संदीप पाठक के जरिए टिकट मिला था, उन पर विशेष नजर रखी जा रही है। पार्टी हाईकमान को आशंका है कि हालिया घटनाक्रम के बाद कुछ विधायकों में असंतोष हो सकता है।
इसी कड़ी में पार्टी ने कई विधायकों को बुधवार सुबह जालंधर में बैठक के लिए बुलाया है। इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेता विधायकों को आगे की रणनीति और संगठन को मजबूत बनाए रखने के उपायों पर चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया विधायकों को संगठन को बचाने और एकजुटता बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश देंगे। संदीप पाठक द्वारा खड़े किए गए संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को बनाए रखना भी बैठक का प्रमुख एजेंडा होगा।
एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सांसदों के दल बदल से शुरुआती झटका जरूर लगा, लेकिन अब पार्टी संगठन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, फिरोजपुर, पटियाला और रोपड़ क्षेत्रों के कुछ विधायकों की गतिविधियों पर खास निगरानी रखी जा रही है। उनके बाहर जाने, बैठकों और संपर्कों पर भी नजर रखी जा रही है।

