
तमाड़ः झारखंड की पारंपरिक सोहराई कला अब सिर्फ गांवों की दीवारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश-विदेश में भी अपनी अलग पहचान बना रही है। तमाड़ प्रखंड के चिरूडीह गांव में उलगुलान मोर्चा के अध्यक्ष मुकेश मुंडा के नेतृत्व में सोहराई कला और संस्कृति के संरक्षण को लेकर खास पहल की गई। गांव भ्रमण के दौरान उन्होंने अश्विनी कुमार महतो के पुत्र और युवा कलाकार मनीष कुमार महतो से मुलाकात की और उनके काम की जमकर सराहना की। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले मनीष कुमार महतो फिलहाल श्रीनाथ विश्वविद्यालय से पेंटिंग विषय में बीएफए की पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने गांव चिरूडीह में महिलाओं और युवाओं को पारंपरिक सोहराई पेंटिंग की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम भी कर रहे हैं।
आज चिरूडीह गांव की दीवारों पर बनी सोहराई पेंटिंग गांव को एक नई पहचान दे रही है। गांव की गलियां और दीवारें झारखंड की संस्कृति, परंपरा और इतिहास की खूबसूरत झलक पेश करती नजर आती हैं। यही वजह है कि “आर्टिस्ट विलेज चिरूडीह” अब देश-विदेश से आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां पहुंचने वाले लोग न सिर्फ इस पारंपरिक कला को करीब से देखते हैं, बल्कि पेंटिंग खरीदकर भी अपने साथ ले जाते हैं।
मनीष कुमार महतो की बनाई पेंटिंग दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरों की आर्ट गैलरियों तक पहुंच चुकी है। वहां आयोजित आर्ट एग्जीबिशन में उनके काम को काफी सराहना मिली है। खास बात यह है कि पेंटिंग बेचकर मिलने वाली राशि को वह फिर से गांव की दीवारों पर कला उकेरने, रंग खरीदने और इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने में लगा देते हैं। बातचीत के दौरान मनीष ने बताया कि अब तक उन्हें किसी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिली है। सीमित संसाधनों के बावजूद वह इस कला अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं स्वर्गीय अश्विनी कुमार महतो की याद में गांव में एक म्यूजियम की नींव भी रखी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह म्यूजियम झारखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
उलगुलान मोर्चा अध्यक्ष मुकेश मुंडा ने कहा कि झारखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति ही हमारी असली पहचान है। इसे बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने मनीष कुमार महतो के काम को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह पहल गांवों में रोजगार, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत कर रही है।

