
यामी गौतम लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और लगातार अलग-अलग किरदार निभा रही हैं। हालांकि, कई सालों तक एक ही क्षेत्र में काम करने के बाद कलाकारों को अक्सर अपना काम एक जैसा लगने लगता है। लेकिन यामी गौतम खुद को हमेशा उत्साहित और रचनात्मक बनाए रखने के लिए एक खास सोच अपनाती हैं। उनका मानना है कि हर नई फिल्म को उसी उत्सुकता और घबराहट के साथ देखना चाहिए, जैसे स्कूल के पहले दिन का अनुभव होता है।
स्कूल के पहले दिन जैसी रहती है भावना
यामी गौतम कहती हैं कि आज भी जब वह किसी नई फिल्म की शुरुआत करती हैं, तो उनके अंदर वही उत्साह और नर्वसनेस होती है, जो बचपन में स्कूल जाते समय महसूस होती थी। अभिनेत्री के मुताबिक, यही भावना उन्हें हर किरदार में पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ काम करने के लिए प्रेरित करती है। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार को अपने हर सीन और हर फ्रेम को बेहतर बनाने के लिए सौ प्रतिशत योगदान देना चाहिए।
कलाकार को हमेशा जमीन से जुड़ा रहना चाहिए
यामी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति फिल्म से बड़ा नहीं होता। वह हमेशा इसी सोच के साथ सेट पर जाती हैं और खुद को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं। उनके अनुसार, कलाकार को हर मौके पर सीखने और खुद को साबित करने की मानसिकता रखनी चाहिए। यही कारण है कि वह अपने हर प्रोजेक्ट को बेहद गंभीरता और समर्पण के साथ करती हैं।
मां बनने के बाद बदला जीवन का नजरिया
यामी गौतम ने मां बनने के बाद अपने जीवन में आए बदलावों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मातृत्व के बाद जीवन को देखने का नजरिया खूबसूरती से बदल जाता है। हालांकि, पेशेवर तौर पर वह आज भी वही अभिनेत्री हैं, जिन्होंने कम उम्र में विकी डोनर जैसी फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। यामी के अनुसार, उनकी निजी और पेशेवर पसंद हमेशा रचनात्मक सोच से प्रेरित रहती हैं।

